4 नवंबर 2028 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 4 नवंबर 2028, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 4 नवंबर 2028 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (23:30 तक), नक्षत्र कृत्तिका (19:06 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 08:37 से 10:13 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 18:14
रात 05:25 तक
तिथि
द्वितीया, 23:30 तक
तृतीया
नक्षत्र
कृत्तिका, 19:06 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 नवंबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 23:30 तक
कृष्ण तृतीया 00:03, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 20:17, 5 नव॰ तक
योग
वरीयान 22:23 तक
परिघअशुभ 21:42, 5 नव॰ तक
करण
तैतिल 11:05 तक
गर 23:30 तक
वणिज 11:49, 5 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
19:52
चंद्रास्त
06:16
दिनमान
12h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
08:37 – 10:13
यमगंड
13:26 – 15:02
गुलिक काल
05:25 – 07:01

4 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:25 – 07:01टालें
शुभ07:01 – 08:37शुभ
रोग08:37 – 10:13टालें
उद्वेग10:13 – 11:49टालें
चर11:49 – 13:26सामान्य
लाभ13:26 – 15:02शुभ
अमृत15:02 – 16:38शुभ
काल16:38 – 18:14टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:14 – 19:38शुभ
उद्वेग19:38 – 21:02टालें
शुभ21:02 – 22:25शुभ
अमृत22:25 – 23:49शुभ
चर23:49 – 01:13सामान्य
रोग01:13 – 02:37टालें
काल02:37 – 04:01टालें
लाभ04:01 – 05:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2506:29दिन
गुरु06:2907:33दिन
मंगल07:3308:37दिन
सूर्य08:3709:41दिन
शुक्र09:4110:45दिन
बुध10:4511:49दिन
चंद्र11:4912:54दिन
शनि12:5413:58दिन
गुरु13:5815:02दिन
मंगल15:0216:06दिन
सूर्य16:0617:10दिन
शुक्र17:1018:14दिन
बुध18:1419:10रात
चंद्र19:1020:06रात
शनि20:0621:02रात
गुरु21:0221:57रात
मंगल21:5722:53रात
सूर्य22:5323:49रात
शुक्र23:4900:45रात
बुध00:4501:41रात
चंद्र01:4102:37रात
शनि02:3703:33रात
गुरु03:3304:29रात
मंगल04:2905:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2600° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।