6 जनवरी 2029 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 6 जनवरी 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 6 जनवरी 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (16:43 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (03:01, 7 जन॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 08:54 से 10:33 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 18:47
रात 05:37 तक
तिथि
षष्ठी, 16:43 तक
सप्तमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 03:01 तक
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 जनवरी 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 16:43 तक
कृष्ण सप्तमी 14:30, 7 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 01:32, 8 जन॰ तक
योग
सौभाग्य 12:55 तक
शोभन 09:52, 7 जन॰ तक
करण
गर 05:52 तक
वणिज 16:43 तक
विष्टि (भद्रा) 03:36, 7 जन॰ तक
बव 14:30, 7 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 10:12 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
22:52
चंद्रास्त
10:37
दिनमान
13h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
08:54 – 10:33
यमगंड
13:50 – 15:29
गुलिक काल
05:36 – 07:15

6 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:36 – 07:15टालें
शुभ07:15 – 08:54शुभ
रोग08:54 – 10:33टालें
उद्वेग10:33 – 12:11टालें
चर12:11 – 13:50सामान्य
लाभ13:50 – 15:29शुभ
अमृत15:29 – 17:08शुभ
काल17:08 – 18:47टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:47 – 20:08शुभ
उद्वेग20:08 – 21:29टालें
शुभ21:29 – 22:51शुभ
अमृत22:51 – 00:12शुभ
चर00:12 – 01:33सामान्य
रोग01:33 – 02:54टालें
काल02:54 – 04:16टालें
लाभ04:16 – 05:37शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3606:42दिन
गुरु06:4207:48दिन
मंगल07:4808:54दिन
सूर्य08:5410:00दिन
शुक्र10:0011:06दिन
बुध11:0612:11दिन
चंद्र12:1113:17दिन
शनि13:1714:23दिन
गुरु14:2315:29दिन
मंगल15:2916:35दिन
सूर्य16:3517:41दिन
शुक्र17:4118:47दिन
बुध18:4719:41रात
चंद्र19:4120:35रात
शनि20:3521:29रात
गुरु21:2922:23रात
मंगल22:2323:18रात
सूर्य23:1800:12रात
शुक्र00:1201:06रात
बुध01:0602:00रात
चंद्र02:0002:54रात
शनि02:5403:49रात
गुरु03:4904:43रात
मंगल04:4305:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
3 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2624° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।