22 जनवरी 2029 को सुवा का पंचांग

सोमवार, 22 जनवरी 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

सोमवार, 22 जनवरी 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (18:13 तक), नक्षत्र रेवती (13:42 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 07:24 से 09:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 18:48
रात 05:47 तक
तिथि
सप्तमी, 18:13 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रेवती, 13:42 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जनवरी 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 18:13 तक
शुक्ल अष्टमी 20:27, 23 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 13:42 तक
अश्विनी 16:26, 23 जन॰ तक
योग
सिद्ध 17:19 तक
साध्य 17:56, 23 जन॰ तक
करण
वणिज 18:13 तक
विष्टि (भद्रा) 07:23, 23 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 13:42 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
11:36
चंद्रास्त
23:16
दिनमान
13h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
07:24 – 09:02
यमगंड
10:40 – 12:17
गुलिक काल
13:55 – 15:33

22 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:47 – 07:24शुभ
काल07:24 – 09:02टालें
शुभ09:02 – 10:40शुभ
रोग10:40 – 12:17टालें
उद्वेग12:17 – 13:55टालें
चर13:55 – 15:33सामान्य
लाभ15:33 – 17:10शुभ
अमृत17:10 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:48 – 20:10सामान्य
रोग20:10 – 21:33टालें
काल21:33 – 22:55टालें
लाभ22:55 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 01:40टालें
शुभ01:40 – 03:02शुभ
अमृत03:02 – 04:25शुभ
चर04:25 – 05:47सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4706:52दिन
शनि06:5207:57दिन
गुरु07:5709:02दिन
मंगल09:0210:07दिन
सूर्य10:0711:12दिन
शुक्र11:1212:17दिन
बुध12:1713:22दिन
चंद्र13:2214:27दिन
शनि14:2715:33दिन
गुरु15:3316:38दिन
मंगल16:3817:43दिन
सूर्य17:4318:48दिन
शुक्र18:4819:43रात
बुध19:4320:38रात
चंद्र20:3821:33रात
शनि21:3322:28रात
गुरु22:2823:23रात
मंगल23:2300:18रात
सूर्य00:1801:12रात
शुक्र01:1202:07रात
बुध02:0703:02रात
चंद्र03:0203:57रात
शनि03:5704:52रात
गुरु04:5205:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
3 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2630° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।