14 अप्रैल 2029 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 14 अप्रैल 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 14 अप्रैल 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (09:40 तक), नक्षत्र रेवती (09:43 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:15 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 09:11 से 10:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:15 – 17:57
रात 06:15 तक
तिथि
अमावस्या, 09:40 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
रेवती, 09:43 तक
अश्विनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अप्रैल 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 09:40 तक
शुक्ल प्रतिपदा 12:03, 15 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 09:43 तक
अश्विनी 12:37, 15 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 09:46 तक
विष्कंभअशुभ 10:38, 15 अप्रैल तक
करण
नाग 09:40 तक
किंस्तुघ्न 22:52 तक
बव 12:03, 15 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 09:43 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:15
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
06:11
चंद्रास्त
17:52
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
अधिक चैत्र
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
09:11 – 10:38
यमगंड
13:34 – 15:02
गुलिक काल
06:15 – 07:43

14 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:15 – 07:43टालें
शुभ07:43 – 09:11शुभ
रोग09:11 – 10:38टालें
उद्वेग10:38 – 12:06टालें
चर12:06 – 13:34सामान्य
लाभ13:34 – 15:02शुभ
अमृत15:02 – 16:29शुभ
काल16:29 – 17:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:57 – 19:29शुभ
उद्वेग19:29 – 21:02टालें
शुभ21:02 – 22:34शुभ
अमृत22:34 – 00:06शुभ
चर00:06 – 01:38सामान्य
रोग01:38 – 03:11टालें
काल03:11 – 04:43टालें
लाभ04:43 – 06:15शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1507:13दिन
गुरु07:1308:12दिन
मंगल08:1209:11दिन
सूर्य09:1110:09दिन
शुक्र10:0911:08दिन
बुध11:0812:06दिन
चंद्र12:0613:05दिन
शनि13:0514:03दिन
गुरु14:0315:02दिन
मंगल15:0216:00दिन
सूर्य16:0016:59दिन
शुक्र16:5917:57दिन
बुध17:5718:59रात
चंद्र18:5920:00रात
शनि20:0021:02रात
गुरु21:0222:03रात
मंगल22:0323:05रात
सूर्य23:0500:06रात
शुक्र00:0601:08रात
बुध01:0802:09रात
चंद्र02:0903:11रात
शनि03:1104:12रात
गुरु04:1205:14रात
मंगल05:1406:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अप्रैल 2029अधिक चैत्र अमावस्याअमावस्या
14 अप्रैल 2029मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
18 अप्रैल 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 अप्रैल 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अप्रैल 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अप्रैल 2029चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
2 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 मई 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 मई 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मई 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मई 2029वैशाख अमावस्याअमावस्या

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2661° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।