28 सितंबर 2029 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 28 सितंबर 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 28 सितंबर 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (16:20 तक), नक्षत्र कृत्तिका (14:12 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 10:25 से 11:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 18:03
रात 05:50 तक
तिथि
पंचमी, 16:20 तक
षष्ठी
नक्षत्र
कृत्तिका, 14:12 तक
रोहिणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 16:20 तक
कृष्ण षष्ठी 18:34, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 16:59, 29 सित॰ तक
योग
वज्रअशुभ 12:23 तक
सिद्धि 13:10, 29 सित॰ तक
करण
तैतिल 16:20 तक
गर 05:30, 29 सित॰ तक
वणिज 18:34, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
22:35
चंद्रास्त
09:02
दिनमान
12h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
10:25 – 11:57
यमगंड
15:00 – 16:31
गुलिक काल
07:22 – 08:54

28 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:51 – 07:22सामान्य
लाभ07:22 – 08:54शुभ
अमृत08:54 – 10:25शुभ
काल10:25 – 11:57टालें
शुभ11:57 – 13:28शुभ
रोग13:28 – 15:00टालें
उद्वेग15:00 – 16:31टालें
चर16:31 – 18:03सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:03 – 19:31टालें
काल19:31 – 20:59टालें
लाभ20:59 – 22:28शुभ
उद्वेग22:28 – 23:56टालें
शुभ23:56 – 01:25शुभ
अमृत01:25 – 02:53शुभ
चर02:53 – 04:21सामान्य
रोग04:21 – 05:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5106:52दिन
बुध06:5207:53दिन
चंद्र07:5308:54दिन
शनि08:5409:55दिन
गुरु09:5510:56दिन
मंगल10:5611:57दिन
सूर्य11:5712:58दिन
शुक्र12:5813:59दिन
बुध13:5915:00दिन
चंद्र15:0016:01दिन
शनि16:0117:02दिन
गुरु17:0218:03दिन
मंगल18:0319:02रात
सूर्य19:0220:01रात
शुक्र20:0120:59रात
बुध20:5921:58रात
चंद्र21:5822:57रात
शनि22:5723:56रात
गुरु23:5600:55रात
मंगल00:5501:54रात
सूर्य01:5402:53रात
शुक्र02:5303:52रात
बुध03:5204:51रात
चंद्र04:5105:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2725° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।