30 सितंबर 2029 को सुवा का पंचांग

रविवार, 30 सितंबर 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

रविवार, 30 सितंबर 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (20:19 तक), नक्षत्र मृगशिरा (19:18 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 16:31 से 18:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 18:03
रात 05:48 तक
तिथि
सप्तमी, 20:19 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 19:18 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 सितंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 20:19 तक
कृष्ण अष्टमी 21:23, 1 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 20:59, 1 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 13:36 तक
वरीयान 13:34, 1 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:31 तक
बव 20:19 तक
बालव 08:56, 1 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 06:13 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:41
दिनमान
12h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:20

अशुभ समय

राहुकाल
16:31 – 18:03
यमगंड
11:56 – 13:28
गुलिक काल
15:00 – 16:31

30 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:49 – 07:21टालें
चर07:21 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:24शुभ
अमृत10:24 – 11:56शुभ
काल11:56 – 13:28टालें
शुभ13:28 – 15:00शुभ
रोग15:00 – 16:31टालें
उद्वेग16:31 – 18:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:03 – 19:31शुभ
अमृत19:31 – 20:59शुभ
चर20:59 – 22:27सामान्य
रोग22:27 – 23:56टालें
काल23:56 – 01:24टालें
लाभ01:24 – 02:52शुभ
उद्वेग02:52 – 04:20टालें
शुभ04:20 – 05:48शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4906:50दिन
शुक्र06:5007:51दिन
बुध07:5108:52दिन
चंद्र08:5209:54दिन
शनि09:5410:55दिन
गुरु10:5511:56दिन
मंगल11:5612:57दिन
सूर्य12:5713:58दिन
शुक्र13:5815:00दिन
बुध15:0016:01दिन
चंद्र16:0117:02दिन
शनि17:0218:03दिन
गुरु18:0319:02रात
मंगल19:0220:01रात
सूर्य20:0120:59रात
शुक्र20:5921:58रात
बुध21:5822:57रात
चंद्र22:5723:56रात
शनि23:5600:54रात
गुरु00:5401:53रात
मंगल01:5302:52रात
सूर्य02:5203:51रात
शुक्र03:5104:49रात
बुध04:4905:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2726° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।