4 सितंबर 2025 को सिडनी का पंचांग

गुरुवार, 4 सितंबर 2025, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

गुरुवार, 4 सितंबर 2025 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (08:52 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (04:14, 5 सित॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 17:39 पर है। राहुकाल 13:20 से 14:46 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 17:39
रात 06:08 तक
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 04:14 तक
श्रवण
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 सितंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 08:52 तक
शुक्ल द्वादशी 08:38, 5 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 04:14, 5 सित॰ तक
श्रवण 04:08, 6 सित॰ तक
योग
सौभाग्य 19:51 तक
शोभन 18:22, 5 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:52 तक
बव 20:50 तक
बालव 08:38, 5 सित॰ तक
चंद्र राशि
धनु 09:51 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
17:39
चंद्रोदय
13:45
चंद्रास्त
03:53
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
13:20 – 14:46
यमगंड
06:09 – 07:35
गुलिक काल
09:02 – 10:28

4 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:09 – 07:35शुभ
रोग07:35 – 09:02टालें
उद्वेग09:02 – 10:28टालें
चर10:28 – 11:54सामान्य
लाभ11:54 – 13:20शुभ
अमृत13:20 – 14:46शुभ
काल14:46 – 16:13टालें
शुभ16:13 – 17:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:39 – 19:12शुभ
चर19:12 – 20:46सामान्य
रोग20:46 – 22:20टालें
काल22:20 – 23:53टालें
लाभ23:53 – 01:27शुभ
उद्वेग01:27 – 03:01टालें
शुभ03:01 – 04:34शुभ
अमृत04:34 – 06:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0907:07दिन
मंगल07:0708:04दिन
सूर्य08:0409:02दिन
शुक्र09:0209:59दिन
बुध09:5910:57दिन
चंद्र10:5711:54दिन
शनि11:5412:51दिन
गुरु12:5113:49दिन
मंगल13:4914:46दिन
सूर्य14:4615:44दिन
शुक्र15:4416:41दिन
बुध16:4117:39दिन
चंद्र17:3918:41रात
शनि18:4119:44रात
गुरु19:4420:46रात
मंगल20:4621:48रात
सूर्य21:4822:51रात
शुक्र22:5123:53रात
बुध23:5300:56रात
चंद्र00:5601:58रात
शनि01:5803:01रात
गुरु03:0104:03रात
मंगल04:0305:06रात
सूर्य05:0606:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2157° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।