15 सितंबर 2025 को सिडनी का पंचांग

सोमवार, 15 सितंबर 2025, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

सोमवार, 15 सितंबर 2025 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (07:36 तक), नक्षत्र मृगशिरा (12:01 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 17:46 पर है। राहुकाल 07:23 से 08:52 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 17:46
रात 05:53 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 12:01 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 सितंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 07:36 तक
कृष्ण नवमी 06:01, 16 सित॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 11:16, 16 सित॰ तक
योग
सिद्धि 09:25 तक
व्यतीपातअशुभ 07:04, 16 सित॰ तक
करण
कौलव 07:36 तक
तैतिल 18:46 तक
गर 06:01, 16 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
17:46
चंद्रोदय
01:22
चंद्रास्त
10:52
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:14

अशुभ समय

राहुकाल
07:23 – 08:52
यमगंड
10:21 – 11:50
गुलिक काल
13:19 – 14:48

15 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:54 – 07:23शुभ
काल07:23 – 08:52टालें
शुभ08:52 – 10:21शुभ
रोग10:21 – 11:50टालें
उद्वेग11:50 – 13:19टालें
चर13:19 – 14:48सामान्य
लाभ14:48 – 16:17शुभ
अमृत16:17 – 17:46शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:46 – 19:17सामान्य
रोग19:17 – 20:48टालें
काल20:48 – 22:19टालें
लाभ22:19 – 23:49शुभ
उद्वेग23:49 – 01:20टालें
शुभ01:20 – 02:51शुभ
अमृत02:51 – 04:22शुभ
चर04:22 – 05:53सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5406:54दिन
शनि06:5407:53दिन
गुरु07:5308:52दिन
मंगल08:5209:52दिन
सूर्य09:5210:51दिन
शुक्र10:5111:50दिन
बुध11:5012:50दिन
चंद्र12:5013:49दिन
शनि13:4914:48दिन
गुरु14:4815:47दिन
मंगल15:4716:47दिन
सूर्य16:4717:46दिन
शुक्र17:4618:47रात
बुध18:4719:47रात
चंद्र19:4720:48रात
शनि20:4821:48रात
गुरु21:4822:49रात
मंगल22:4923:49रात
सूर्य23:4900:50रात
शुक्र00:5001:51रात
बुध01:5102:51रात
चंद्र02:5103:52रात
शनि03:5204:52रात
गुरु04:5205:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2161° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।