29 अक्टूबर 2025 को सिडनी का पंचांग

बुधवार, 29 अक्टूबर 2025, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

बुधवार, 29 अक्टूबर 2025 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (14:53 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (23:00 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 12:39 से 14:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 19:20
रात 05:56 तक
तिथि
सप्तमी, 14:53 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 23:00 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 14:53 तक
शुक्ल अष्टमी 15:37, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 00:03, 31 अक्टू॰ तक
योग
धृति 13:21 तक
शूलअशुभ 12:50, 30 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 14:53 तक
विष्टि (भद्रा) 03:20, 30 अक्टू॰ तक
बव 15:37, 30 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
11:19
चंद्रास्त
01:23
दिनमान
13h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 13:05 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:39 – 14:19
यमगंड
07:38 – 09:18
गुलिक काल
10:58 – 12:39

29 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:57 – 07:38शुभ
अमृत07:38 – 09:18शुभ
काल09:18 – 10:58टालें
शुभ10:58 – 12:39शुभ
रोग12:39 – 14:19टालें
उद्वेग14:19 – 15:59टालें
चर15:59 – 17:40सामान्य
लाभ17:40 – 19:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:20 – 20:39टालें
शुभ20:39 – 21:59शुभ
अमृत21:59 – 23:19शुभ
चर23:19 – 00:38सामान्य
रोग00:38 – 01:58टालें
काल01:58 – 03:17टालें
लाभ03:17 – 04:37शुभ
उद्वेग04:37 – 05:56टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5707:04दिन
चंद्र07:0408:11दिन
शनि08:1109:18दिन
गुरु09:1810:25दिन
मंगल10:2511:32दिन
सूर्य11:3212:39दिन
शुक्र12:3913:46दिन
बुध13:4614:52दिन
चंद्र14:5215:59दिन
शनि15:5917:06दिन
गुरु17:0618:13दिन
मंगल18:1319:20दिन
सूर्य19:2020:13रात
शुक्र20:1321:06रात
बुध21:0621:59रात
चंद्र21:5922:52रात
शनि22:5223:45रात
गुरु23:4500:38रात
मंगल00:3801:31रात
सूर्य01:3102:24रात
शुक्र02:2403:17रात
बुध03:1704:10रात
चंद्र04:1005:03रात
शनि05:0305:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2178° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।