16 जनवरी 2026 को सिडनी का पंचांग

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (03:52, 17 जन॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (11:17 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 20:08 पर है। राहुकाल 11:18 से 13:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 20:08
रात 06:01 तक
तिथि
त्रयोदशी, 03:52 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 11:17 तक
मूल
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जनवरी 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 03:52, 17 जन॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 05:34, 18 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 13:42, 17 जन॰ तक
योग
ध्रुव 02:36, 17 जन॰ तक
व्याघातअशुभ 02:48, 18 जन॰ तक
करण
गर 14:52 तक
वणिज 03:52, 17 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 16:46, 17 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
20:08
चंद्रोदय
03:06
चंद्रास्त
18:26
दिनमान
14h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
12:36 – 13:32

अशुभ समय

राहुकाल
11:18 – 13:04
यमगंड
16:36 – 18:22
गुलिक काल
07:46 – 09:32

16 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:00 – 07:46सामान्य
लाभ07:46 – 09:32शुभ
अमृत09:32 – 11:18शुभ
काल11:18 – 13:04टालें
शुभ13:04 – 14:50शुभ
रोग14:50 – 16:36टालें
उद्वेग16:36 – 18:22टालें
चर18:22 – 20:08सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग20:08 – 21:22टालें
काल21:22 – 22:36टालें
लाभ22:36 – 23:50शुभ
उद्वेग23:50 – 01:05टालें
शुभ01:05 – 02:19शुभ
अमृत02:19 – 03:33शुभ
चर03:33 – 04:47सामान्य
रोग04:47 – 06:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0007:11दिन
बुध07:1108:21दिन
चंद्र08:2109:32दिन
शनि09:3210:43दिन
गुरु10:4311:53दिन
मंगल11:5313:04दिन
सूर्य13:0414:15दिन
शुक्र14:1515:25दिन
बुध15:2516:36दिन
चंद्र16:3617:47दिन
शनि17:4718:58दिन
गुरु18:5820:08दिन
मंगल20:0820:58रात
सूर्य20:5821:47रात
शुक्र21:4722:36रात
बुध22:3623:26रात
चंद्र23:2600:15रात
शनि00:1501:05रात
गुरु01:0501:54रात
मंगल01:5402:43रात
सूर्य02:4303:33रात
शुक्र03:3304:22रात
बुध04:2205:11रात
चंद्र05:1106:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
23 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2208° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।