22 अक्टूबर 2026 को सिडनी का पंचांग

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (20:18 तक), नक्षत्र शतभिषा (02:19, 23 अक्टू॰ तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 14:18 से 15:57 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 19:14
रात 06:04 तक
तिथि
एकादशी, 20:18 तक
द्वादशी
नक्षत्र
शतभिषा, 02:19 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 20:18 तक
शुक्ल द्वादशी 20:06, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 02:19, 23 अक्टू॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 02:33, 24 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 05:09, 23 अक्टू॰ तक
ध्रुव 03:38, 24 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 08:06 तक
विष्टि (भद्रा) 20:18 तक
बव 08:18, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
15:10
चंद्रास्त
03:38
दिनमान
13h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
14:18 – 15:57
यमगंड
06:05 – 07:44
गुलिक काल
09:22 – 11:01

22 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:05 – 07:44शुभ
रोग07:44 – 09:22टालें
उद्वेग09:22 – 11:01टालें
चर11:01 – 12:39सामान्य
लाभ12:39 – 14:18शुभ
अमृत14:18 – 15:57शुभ
काल15:57 – 17:35टालें
शुभ17:35 – 19:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:14 – 20:35शुभ
चर20:35 – 21:56सामान्य
रोग21:56 – 23:18टालें
काल23:18 – 00:39टालें
लाभ00:39 – 02:00शुभ
उद्वेग02:00 – 03:22टालें
शुभ03:22 – 04:43शुभ
अमृत04:43 – 06:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0507:11दिन
मंगल07:1108:17दिन
सूर्य08:1709:22दिन
शुक्र09:2210:28दिन
बुध10:2811:34दिन
चंद्र11:3412:39दिन
शनि12:3913:45दिन
गुरु13:4514:51दिन
मंगल14:5115:57दिन
सूर्य15:5717:02दिन
शुक्र17:0218:08दिन
बुध18:0819:14दिन
चंद्र19:1420:08रात
शनि20:0821:02रात
गुरु21:0221:56रात
मंगल21:5622:50रात
सूर्य22:5023:45रात
शुक्र23:4500:39रात
बुध00:3901:33रात
चंद्र01:3302:27रात
शनि02:2703:22रात
गुरु03:2204:16रात
मंगल04:1605:10रात
सूर्य05:1006:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2315° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।