17 सितंबर 2029 को सिडनी का पंचांग

सोमवार, 17 सितंबर 2029, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

सोमवार, 17 सितंबर 2029 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (21:43 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (14:29 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 17:47 पर है। राहुकाल 07:21 से 08:50 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 17:47
रात 05:50 तक
तिथि
दशमी, 21:43 तक
एकादशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 14:29 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 सितंबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल दशमी 21:43 तक
शुक्ल एकादशी 21:53, 18 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 15:11, 18 सित॰ तक
योग
सौभाग्य 08:17 तक
शोभन 07:08, 18 सित॰ तक
करण
तैतिल 09:49 तक
गर 21:43 तक
वणिज 09:45, 18 सित॰ तक
चंद्र राशि
धनु 20:37 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
17:47
चंद्रोदय
12:38
चंद्रास्त
02:13
दिनमान
11h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
07:21 – 08:50
यमगंड
10:20 – 11:49
गुलिक काल
13:19 – 14:48

17 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:51 – 07:21शुभ
काल07:21 – 08:50टालें
शुभ08:50 – 10:20शुभ
रोग10:20 – 11:49टालें
उद्वेग11:49 – 13:19टालें
चर13:19 – 14:48सामान्य
लाभ14:48 – 16:18शुभ
अमृत16:18 – 17:47शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:47 – 19:18सामान्य
रोग19:18 – 20:48टालें
काल20:48 – 22:18टालें
लाभ22:18 – 23:49शुभ
उद्वेग23:49 – 01:19टालें
शुभ01:19 – 02:49शुभ
अमृत02:49 – 04:20शुभ
चर04:20 – 05:50सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5106:51दिन
शनि06:5107:51दिन
गुरु07:5108:50दिन
मंगल08:5009:50दिन
सूर्य09:5010:50दिन
शुक्र10:5011:49दिन
बुध11:4912:49दिन
चंद्र12:4913:49दिन
शनि13:4914:48दिन
गुरु14:4815:48दिन
मंगल15:4816:48दिन
सूर्य16:4817:47दिन
शुक्र17:4718:48रात
बुध18:4819:48रात
चंद्र19:4820:48रात
शनि20:4821:48रात
गुरु21:4822:49रात
मंगल22:4923:49रात
सूर्य23:4900:49रात
शुक्र00:4901:49रात
बुध01:4902:49रात
चंद्र02:4903:50रात
शनि03:5004:50रात
गुरु04:5005:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
27 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2721° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।