21 सितंबर 2029 को सिडनी का पंचांग

शुक्रवार, 21 सितंबर 2029, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

शुक्रवार, 21 सितंबर 2029 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (00:48, 22 सित॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (19:40 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 10:17 से 11:48 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 17:50
रात 05:44 तक
तिथि
चतुर्दशी, 00:48 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
शतभिषा, 19:40 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 सितंबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 00:48, 22 सित॰ तक
पूर्णिमा 02:29, 23 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 19:40 तक
पूर्वा भाद्रपद 21:51, 22 सित॰ तक
योग
शूलअशुभ 05:46, 22 सित॰ तक
करण
गर 12:05 तक
वणिज 00:48, 22 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:36, 22 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
16:36
चंद्रास्त
04:34
दिनमान
12h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
10:17 – 11:48
यमगंड
14:49 – 16:20
गुलिक काल
07:16 – 08:47

21 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:46 – 07:16सामान्य
लाभ07:16 – 08:47शुभ
अमृत08:47 – 10:17शुभ
काल10:17 – 11:48टालें
शुभ11:48 – 13:19शुभ
रोग13:19 – 14:49टालें
उद्वेग14:49 – 16:20टालें
चर16:20 – 17:50सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:50 – 19:19टालें
काल19:19 – 20:49टालें
लाभ20:49 – 22:18शुभ
उद्वेग22:18 – 23:47टालें
शुभ23:47 – 01:17शुभ
अमृत01:17 – 02:46शुभ
चर02:46 – 04:15सामान्य
रोग04:15 – 05:44टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4606:46दिन
बुध06:4607:47दिन
चंद्र07:4708:47दिन
शनि08:4709:47दिन
गुरु09:4710:48दिन
मंगल10:4811:48दिन
सूर्य11:4812:48दिन
शुक्र12:4813:49दिन
बुध13:4914:49दिन
चंद्र14:4915:49दिन
शनि15:4916:50दिन
गुरु16:5017:50दिन
मंगल17:5018:50रात
सूर्य18:5019:49रात
शुक्र19:4920:49रात
बुध20:4921:48रात
चंद्र21:4822:48रात
शनि22:4823:47रात
गुरु23:4700:47रात
मंगल00:4701:46रात
सूर्य01:4602:46रात
शुक्र02:4603:45रात
बुध03:4504:45रात
चंद्र04:4505:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
27 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2722° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।