12 अक्टूबर 2029 को सिडनी का पंचांग

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2029, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2029 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (13:34 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (22:26 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 11:05 से 12:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 19:06
रात 06:16 तक
तिथि
पंचमी, 13:34 तक
षष्ठी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 22:26 तक
मूल
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 13:34 तक
शुक्ल षष्ठी 11:41, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 21:32, 13 अक्टू॰ तक
योग
सौभाग्य 19:32 तक
शोभन 17:00, 13 अक्टू॰ तक
करण
बालव 13:34 तक
कौलव 00:33, 13 अक्टू॰ तक
तैतिल 11:41, 13 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
09:25
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
12:16 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
11:05 – 12:41
यमगंड
15:54 – 17:30
गुलिक काल
07:53 – 09:29

12 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:17 – 07:53सामान्य
लाभ07:53 – 09:29शुभ
अमृत09:29 – 11:05शुभ
काल11:05 – 12:41टालें
शुभ12:41 – 14:17शुभ
रोग14:17 – 15:54टालें
उद्वेग15:54 – 17:30टालें
चर17:30 – 19:06सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:06 – 20:29टालें
काल20:29 – 21:53टालें
लाभ21:53 – 23:17शुभ
उद्वेग23:17 – 00:41टालें
शुभ00:41 – 02:05शुभ
अमृत02:05 – 03:28शुभ
चर03:28 – 04:52सामान्य
रोग04:52 – 06:16टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1707:21दिन
बुध07:2108:25दिन
चंद्र08:2509:29दिन
शनि09:2910:33दिन
गुरु10:3311:37दिन
मंगल11:3712:41दिन
सूर्य12:4113:45दिन
शुक्र13:4514:49दिन
बुध14:4915:54दिन
चंद्र15:5416:58दिन
शनि16:5818:02दिन
गुरु18:0219:06दिन
मंगल19:0620:01रात
सूर्य20:0120:57रात
शुक्र20:5721:53रात
बुध21:5322:49रात
चंद्र22:4923:45रात
शनि23:4500:41रात
गुरु00:4101:37रात
मंगल01:3702:33रात
सूर्य02:3303:28रात
शुक्र03:2804:24रात
बुध04:2405:20रात
चंद्र05:2006:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2730° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।