5 अक्टूबर 2026 को ठाणे का पंचांग

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026, ठाणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को ठाणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (02:07, 6 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पुष्य (23:09 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 18:23 पर है। राहुकाल 07:58 से 09:28 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 18:23
रात 06:29 तक
तिथि
दशमी, 02:07 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुष्य, 23:09 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण दशमी 02:07, 6 अक्टू॰ तक
कृष्ण एकादशी 00:34, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 23:09 तक
आश्लेषा 22:17, 6 अक्टू॰ तक
योग
शिव 09:51 तक
सिद्ध 07:20, 6 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 14:59 तक
विष्टि (भद्रा) 02:07, 6 अक्टू॰ तक
बव 13:19, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
18:23
चंद्रोदय
01:13
चंद्रास्त
14:47
दिनमान
11h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
07:58 – 09:28
यमगंड
10:57 – 12:26
गुलिक काल
13:55 – 15:24

5 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:29 – 07:58शुभ
काल07:58 – 09:28टालें
शुभ09:28 – 10:57शुभ
रोग10:57 – 12:26टालें
उद्वेग12:26 – 13:55टालें
चर13:55 – 15:24सामान्य
लाभ15:24 – 16:54शुभ
अमृत16:54 – 18:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:23 – 19:54सामान्य
रोग19:54 – 21:24टालें
काल21:24 – 22:55टालें
लाभ22:55 – 00:26शुभ
उद्वेग00:26 – 01:57टालें
शुभ01:57 – 03:28शुभ
अमृत03:28 – 04:59शुभ
चर04:59 – 06:29सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2907:29दिन
शनि07:2908:28दिन
गुरु08:2809:28दिन
मंगल09:2810:27दिन
सूर्य10:2711:27दिन
शुक्र11:2712:26दिन
बुध12:2613:25दिन
चंद्र13:2514:25दिन
शनि14:2515:24दिन
गुरु15:2416:24दिन
मंगल16:2417:23दिन
सूर्य17:2318:23दिन
शुक्र18:2319:23रात
बुध19:2320:24रात
चंद्र20:2421:24रात
शनि21:2422:25रात
गुरु22:2523:26रात
मंगल23:2600:26रात
सूर्य00:2601:27रात
शुक्र01:2702:27रात
बुध02:2703:28रात
चंद्र03:2804:28रात
शनि04:2805:29रात
गुरु05:2906:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां ठाणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2309° (लाहिड़ी)। समय ठाणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।