31 अक्टूबर 2027 को ठाणे का पंचांग

रविवार, 31 अक्टूबर 2027, ठाणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 31 अक्टूबर 2027 को ठाणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (17:13 तक), नक्षत्र विशाखा (09:31 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 16:39 से 18:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 18:05
रात 06:38 तक
तिथि
द्वितीया, 17:13 तक
तृतीया
नक्षत्र
विशाखा, 09:31 तक
अनुराधा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 17:13 तक
शुक्ल तृतीया 17:15, 1 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 09:31 तक
अनुराधा 09:57, 1 नव॰ तक
योग
सौभाग्य 20:56 तक
शोभन 19:54, 1 नव॰ तक
करण
कौलव 17:13 तक
तैतिल 05:09, 1 नव॰ तक
गर 17:15, 1 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
08:11
चंद्रास्त
19:21
दिनमान
11h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:57 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
16:39 – 18:05
यमगंड
12:21 – 13:47
गुलिक काल
15:13 – 16:39

31 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:38 – 08:03टालें
चर08:03 – 09:29सामान्य
लाभ09:29 – 10:55शुभ
अमृत10:55 – 12:21शुभ
काल12:21 – 13:47टालें
शुभ13:47 – 15:13शुभ
रोग15:13 – 16:39टालें
उद्वेग16:39 – 18:05टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:05 – 19:39शुभ
अमृत19:39 – 21:13शुभ
चर21:13 – 22:47सामान्य
रोग22:47 – 00:21टालें
काल00:21 – 01:56टालें
लाभ01:56 – 03:30शुभ
उद्वेग03:30 – 05:04टालें
शुभ05:04 – 06:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3807:35दिन
शुक्र07:3508:32दिन
बुध08:3209:29दिन
चंद्र09:2910:27दिन
शनि10:2711:24दिन
गुरु11:2412:21दिन
मंगल12:2113:18दिन
सूर्य13:1814:16दिन
शुक्र14:1615:13दिन
बुध15:1316:10दिन
चंद्र16:1017:08दिन
शनि17:0818:05दिन
गुरु18:0519:08रात
मंगल19:0820:10रात
सूर्य20:1021:13रात
शुक्र21:1322:16रात
बुध22:1623:19रात
चंद्र23:1900:21रात
शनि00:2101:24रात
गुरु01:2402:27रात
मंगल02:2703:30रात
सूर्य03:3004:32रात
शुक्र04:3205:35रात
बुध05:3506:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां ठाणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2458° (लाहिड़ी)। समय ठाणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।