15 नवंबर 2027 को ठाणे का पंचांग

सोमवार, 15 नवंबर 2027, ठाणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 15 नवंबर 2027 को ठाणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (07:28 तक), नक्षत्र कृत्तिका (07:06 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 08:09 से 09:33 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 17:59
रात 06:45 तक
तिथि
द्वितीया, 05:41 तक
नक्षत्र
रोहिणी, 06:00 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 नवंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 07:28 तक
कृष्ण द्वितीया 05:41, 16 नव॰ तक
कृष्ण तृतीया 03:42, 17 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 06:00, 16 नव॰ तक
मृगशिरा 04:42, 17 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 15:21 तक
शिव 12:39, 16 नव॰ तक
करण
कौलव 07:28 तक
तैतिल 18:37 तक
गर 05:41, 16 नव॰ तक
वणिज 16:43, 16 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
18:57
चंद्रास्त
07:46
दिनमान
11h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:03 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
08:09 – 09:33
यमगंड
10:58 – 12:22
गुलिक काल
13:46 – 15:11

15 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:45 – 08:09शुभ
काल08:09 – 09:33टालें
शुभ09:33 – 10:58शुभ
रोग10:58 – 12:22टालें
उद्वेग12:22 – 13:46टालें
चर13:46 – 15:11सामान्य
लाभ15:11 – 16:35शुभ
अमृत16:35 – 17:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:59 – 19:35सामान्य
रोग19:35 – 21:11टालें
काल21:11 – 22:47टालें
लाभ22:47 – 00:22शुभ
उद्वेग00:22 – 01:58टालें
शुभ01:58 – 03:34शुभ
अमृत03:34 – 05:10शुभ
चर05:10 – 06:45सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4507:41दिन
शनि07:4108:37दिन
गुरु08:3709:33दिन
मंगल09:3310:30दिन
सूर्य10:3011:26दिन
शुक्र11:2612:22दिन
बुध12:2213:18दिन
चंद्र13:1814:14दिन
शनि14:1415:11दिन
गुरु15:1116:07दिन
मंगल16:0717:03दिन
सूर्य17:0317:59दिन
शुक्र17:5919:03रात
बुध19:0320:07रात
चंद्र20:0721:11रात
शनि21:1122:15रात
गुरु22:1523:18रात
मंगल23:1800:22रात
सूर्य00:2201:26रात
शुक्र01:2602:30रात
बुध02:3003:34रात
चंद्र03:3404:38रात
शनि04:3805:42रात
गुरु05:4206:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां ठाणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2464° (लाहिड़ी)। समय ठाणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।