26 जनवरी 2028 को उदयपुर का पंचांग

बुधवार, 26 जनवरी 2028, उदयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 26 जनवरी 2028 को उदयपुर में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (20:42 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (16:48 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:19 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 12:47 से 14:09 तक है।

दिन और रात
दिन 07:19 – 18:15
रात 07:19 तक
तिथि
अमावस्या, 20:42 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 16:48 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जनवरी 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 20:42 तक
शुक्ल प्रतिपदा 23:19, 27 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 19:49, 27 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 13:31 तक
सिद्धि 14:22, 27 जन॰ तक
करण
चतुष्पद 07:28 तक
नाग 20:42 तक
किंस्तुघ्न 09:59, 27 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:19
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
07:01
चंद्रास्त
18:06
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:34 – 06:27
अभिजीत मुहूर्त
12:25 – 13:09 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:47 – 14:09
यमगंड
08:41 – 10:03
गुलिक काल
11:25 – 12:47

26 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:19 – 08:41शुभ
अमृत08:41 – 10:03शुभ
काल10:03 – 11:25टालें
शुभ11:25 – 12:47शुभ
रोग12:47 – 14:09टालें
उद्वेग14:09 – 15:31टालें
चर15:31 – 16:53सामान्य
लाभ16:53 – 18:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:15 – 19:53टालें
शुभ19:53 – 21:31शुभ
अमृत21:31 – 23:09शुभ
चर23:09 – 00:47सामान्य
रोग00:47 – 02:25टालें
काल02:25 – 04:03टालें
लाभ04:03 – 05:41शुभ
उद्वेग05:41 – 07:19टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:1908:14दिन
चंद्र08:1409:08दिन
शनि09:0810:03दिन
गुरु10:0310:58दिन
मंगल10:5811:52दिन
सूर्य11:5212:47दिन
शुक्र12:4713:42दिन
बुध13:4214:36दिन
चंद्र14:3615:31दिन
शनि15:3116:26दिन
गुरु16:2617:21दिन
मंगल17:2118:15दिन
सूर्य18:1519:21रात
शुक्र19:2120:26रात
बुध20:2621:31रात
चंद्र21:3122:36रात
शनि22:3623:42रात
गुरु23:4200:47रात
मंगल00:4701:52रात
सूर्य01:5202:58रात
शुक्र02:5804:03रात
बुध04:0305:08रात
चंद्र05:0806:13रात
शनि06:1307:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां उदयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2491° (लाहिड़ी)। समय उदयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।