23 फ़रवरी 2029 को उदयपुर का पंचांग

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2029, उदयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2029 को उदयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (10:06 तक), नक्षत्र मृगशिरा (01:06, 24 फ़र॰ तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 07:02 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 11:22 से 12:48 तक है।

दिन और रात
दिन 07:02 – 18:34
रात 07:02 तक
तिथि
नवमी, 10:06 तक
दशमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 01:06 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल नवमी 10:06 तक
शुक्ल दशमी 10:04, 24 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 01:06, 24 फ़र॰ तक
आर्द्रा 01:10, 25 फ़र॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 17:19 तक
प्रीति 15:56, 24 फ़र॰ तक
करण
कौलव 10:06 तक
तैतिल 22:12 तक
गर 10:04, 24 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 12:46 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:02
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
13:08
चंद्रास्त
02:21
दिनमान
11h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:12
अभिजीत मुहूर्त
12:25 – 13:11

अशुभ समय

राहुकाल
11:22 – 12:48
यमगंड
15:41 – 17:07
गुलिक काल
08:29 – 09:55

23 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:02 – 08:29सामान्य
लाभ08:29 – 09:55शुभ
अमृत09:55 – 11:22शुभ
काल11:22 – 12:48टालें
शुभ12:48 – 14:15शुभ
रोग14:15 – 15:41टालें
उद्वेग15:41 – 17:07टालें
चर17:07 – 18:34सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:34 – 20:07टालें
काल20:07 – 21:41टालें
लाभ21:41 – 23:14शुभ
उद्वेग23:14 – 00:48टालें
शुभ00:48 – 02:21शुभ
अमृत02:21 – 03:55शुभ
चर03:55 – 05:28सामान्य
रोग05:28 – 07:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0208:00दिन
बुध08:0008:58दिन
चंद्र08:5809:55दिन
शनि09:5510:53दिन
गुरु10:5311:50दिन
मंगल11:5012:48दिन
सूर्य12:4813:46दिन
शुक्र13:4614:43दिन
बुध14:4315:41दिन
चंद्र15:4116:39दिन
शनि16:3917:36दिन
गुरु17:3618:34दिन
मंगल18:3419:36रात
सूर्य19:3620:38रात
शुक्र20:3821:41रात
बुध21:4122:43रात
चंद्र22:4323:45रात
शनि23:4500:48रात
गुरु00:4801:50रात
मंगल01:5002:52रात
सूर्य02:5203:55रात
शुक्र03:5504:57रात
बुध04:5705:59रात
चंद्र05:5907:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां उदयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2642° (लाहिड़ी)। समय उदयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।