8 फ़रवरी 2026 को वाराणसी का पंचांग

रविवार, 8 फ़रवरी 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 8 फ़रवरी 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (05:01, 9 फ़र॰ तक), नक्षत्र स्वाति (05:02, 9 फ़र॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:47 पर है। राहुकाल 16:23 से 17:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:47
रात 06:36 तक
तिथि
सप्तमी, 05:01 तक
अष्टमी
नक्षत्र
स्वाति, 05:02 तक
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 05:01, 9 फ़र॰ तक
कृष्ण अष्टमी 07:27, 10 फ़र॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 05:02, 9 फ़र॰ तक
विशाखा 07:55, 10 फ़र॰ तक
योग
गंडअशुभ 00:08, 9 फ़र॰ तक
वृद्धि 00:51, 10 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:55 तक
बव 05:01, 9 फ़र॰ तक
बालव 18:13, 9 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:47
चंद्रोदय
23:52
चंद्रास्त
10:14
दिनमान
11h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
16:23 – 17:47
यमगंड
12:12 – 13:36
गुलिक काल
14:59 – 16:23

8 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:37 – 08:01टालें
चर08:01 – 09:24सामान्य
लाभ09:24 – 10:48शुभ
अमृत10:48 – 12:12शुभ
काल12:12 – 13:36टालें
शुभ13:36 – 14:59शुभ
रोग14:59 – 16:23टालें
उद्वेग16:23 – 17:47टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:47 – 19:23शुभ
अमृत19:23 – 20:59शुभ
चर20:59 – 22:35सामान्य
रोग22:35 – 00:12टालें
काल00:12 – 01:48टालें
लाभ01:48 – 03:24शुभ
उद्वेग03:24 – 05:00टालें
शुभ05:00 – 06:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3707:33दिन
शुक्र07:3308:29दिन
बुध08:2909:24दिन
चंद्र09:2410:20दिन
शनि10:2011:16दिन
गुरु11:1612:12दिन
मंगल12:1213:08दिन
सूर्य13:0814:03दिन
शुक्र14:0314:59दिन
बुध14:5915:55दिन
चंद्र15:5516:51दिन
शनि16:5117:47दिन
गुरु17:4718:51रात
मंगल18:5119:55रात
सूर्य19:5520:59रात
शुक्र20:5922:03रात
बुध22:0323:07रात
चंद्र23:0700:12रात
शनि00:1201:16रात
गुरु01:1602:20रात
मंगल02:2003:24रात
सूर्य03:2404:28रात
शुक्र04:2805:32रात
बुध05:3206:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2217° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।