23 जुलाई 2026 को वाराणसी का पंचांग

गुरुवार, 23 जुलाई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (07:03 तक), नक्षत्र विशाखा (01:42, 24 जुल॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:20 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 13:45 से 15:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:20 – 18:48
रात 05:21 तक
तिथि
दशमी
नक्षत्र
विशाखा, 01:42 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जुलाई 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल नवमी 07:03 तक
शुक्ल दशमी 09:13, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 01:42, 24 जुल॰ तक
अनुराधा 04:36, 25 जुल॰ तक
योग
शुभ 19:20 तक
शुक्ल 20:11, 24 जुल॰ तक
करण
कौलव 07:03 तक
तैतिल 20:06 तक
गर 09:13, 24 जुल॰ तक
चंद्र राशि
तुला 19:01 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:20
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
13:51
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
13:45 – 15:26
यमगंड
05:20 – 07:01
गुलिक काल
08:42 – 10:23

23 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:20 – 07:01शुभ
रोग07:01 – 08:42टालें
उद्वेग08:42 – 10:23टालें
चर10:23 – 12:04सामान्य
लाभ12:04 – 13:45शुभ
अमृत13:45 – 15:26शुभ
काल15:26 – 17:07टालें
शुभ17:07 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:48 – 20:07शुभ
चर20:07 – 21:26सामान्य
रोग21:26 – 22:45टालें
काल22:45 – 00:04टालें
लाभ00:04 – 01:23शुभ
उद्वेग01:23 – 02:42टालें
शुभ02:42 – 04:02शुभ
अमृत04:02 – 05:21शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2006:28दिन
मंगल06:2807:35दिन
सूर्य07:3508:42दिन
शुक्र08:4209:49दिन
बुध09:4910:57दिन
चंद्र10:5712:04दिन
शनि12:0413:11दिन
गुरु13:1114:19दिन
मंगल14:1915:26दिन
सूर्य15:2616:33दिन
शुक्र16:3317:40दिन
बुध17:4018:48दिन
चंद्र18:4819:40रात
शनि19:4020:33रात
गुरु20:3321:26रात
मंगल21:2622:19रात
सूर्य22:1923:11रात
शुक्र23:1100:04रात
बुध00:0400:57रात
चंद्र00:5701:50रात
शनि01:5002:42रात
गुरु02:4203:35रात
मंगल03:3504:28रात
सूर्य04:2805:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2280° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।