16 जून 2027 को वाराणसी का पंचांग

बुधवार, 16 जून 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 16 जून 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (03:20, 17 जून तक), नक्षत्र विशाखा (19:44 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:07 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 11:58 से 13:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:07 – 18:50
रात 05:07 तक
तिथि
त्रयोदशी, 03:20 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
विशाखा, 19:44 तक
अनुराधा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जून 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 03:20, 17 जून तक
शुक्ल चतुर्दशी 04:35, 18 जून तक
नक्षत्र
विशाखा 19:44 तक
अनुराधा 21:30, 17 जून तक
योग
शिव 06:09 तक
सिद्ध 05:53, 17 जून तक
करण
कौलव 14:52 तक
तैतिल 03:20, 17 जून तक
गर 15:54, 17 जून तक
चंद्र राशि
तुला 13:21 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:07
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
16:38
चंद्रास्त
02:35
दिनमान
13h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:45 – 04:26
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:26 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:58 – 13:41
यमगंड
06:50 – 08:33
गुलिक काल
10:15 – 11:58

16 जून 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:07 – 06:50शुभ
अमृत06:50 – 08:33शुभ
काल08:33 – 10:15टालें
शुभ10:15 – 11:58शुभ
रोग11:58 – 13:41टालें
उद्वेग13:41 – 15:24टालें
चर15:24 – 17:07सामान्य
लाभ17:07 – 18:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:50 – 20:07टालें
शुभ20:07 – 21:24शुभ
अमृत21:24 – 22:41शुभ
चर22:41 – 23:58सामान्य
रोग23:58 – 01:16टालें
काल01:16 – 02:33टालें
लाभ02:33 – 03:50शुभ
उद्वेग03:50 – 05:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:0706:16दिन
चंद्र06:1607:24दिन
शनि07:2408:33दिन
गुरु08:3309:41दिन
मंगल09:4110:50दिन
सूर्य10:5011:58दिन
शुक्र11:5813:07दिन
बुध13:0714:15दिन
चंद्र14:1515:24दिन
शनि15:2416:32दिन
गुरु16:3217:41दिन
मंगल17:4118:50दिन
सूर्य18:5019:41रात
शुक्र19:4120:32रात
बुध20:3221:24रात
चंद्र21:2422:15रात
शनि22:1523:07रात
गुरु23:0723:58रात
मंगल23:5800:50रात
सूर्य00:5001:41रात
शुक्र01:4102:33रात
बुध02:3303:24रात
चंद्र03:2404:16रात
शनि04:1605:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 जून 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 जून 2027ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
23 जून 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जून 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जुल॰ 2027आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2406° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।