12 जनवरी 2025 को वॉशिंगटन डी.सी. का पंचांग

रविवार, 12 जनवरी 2025, वॉशिंगटन डी.सी., संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

रविवार, 12 जनवरी 2025 को वॉशिंगटन डी.सी. में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (18:33 तक), नक्षत्र आर्द्रा (00:08, 13 जन॰ तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 07:26 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 15:54 से 17:07 तक है।

दिन और रात
दिन 07:26 – 17:07
रात 07:25 तक
तिथि
चतुर्दशी, 18:33 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
आर्द्रा, 00:08 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जनवरी 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 18:33 तक
पूर्णिमा 17:26, 13 जन॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 00:08, 13 जन॰ तक
पुनर्वसु 23:47, 13 जन॰ तक
योग
इंद्र 20:14 तक
वैधृतिअशुभ 18:08, 13 जन॰ तक
करण
वणिज 18:33 तक
विष्टि (भद्रा) 05:56, 13 जन॰ तक
बव 17:26, 13 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:26
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
15:39
चंद्रास्त
06:40
दिनमान
9h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:31 – 06:28
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
15:54 – 17:07
यमगंड
12:16 – 13:29
गुलिक काल
14:42 – 15:54

12 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:26 – 08:38टालें
चर08:38 – 09:51सामान्य
लाभ09:51 – 11:04शुभ
अमृत11:04 – 12:16शुभ
काल12:16 – 13:29टालें
शुभ13:29 – 14:42शुभ
रोग14:42 – 15:54टालें
उद्वेग15:54 – 17:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:07 – 18:54शुभ
अमृत18:54 – 20:42शुभ
चर20:42 – 22:29सामान्य
रोग22:29 – 00:16टालें
काल00:16 – 02:03टालें
लाभ02:03 – 03:51शुभ
उद्वेग03:51 – 05:38टालें
शुभ05:38 – 07:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:2608:14दिन
शुक्र08:1409:02दिन
बुध09:0209:51दिन
चंद्र09:5110:39दिन
शनि10:3911:28दिन
गुरु11:2812:16दिन
मंगल12:1613:05दिन
सूर्य13:0513:53दिन
शुक्र13:5314:42दिन
बुध14:4215:30दिन
चंद्र15:3016:19दिन
शनि16:1917:07दिन
गुरु17:0718:19रात
मंगल18:1919:30रात
सूर्य19:3020:42रात
शुक्र20:4221:53रात
बुध21:5323:05रात
चंद्र23:0500:16रात
शनि00:1601:28रात
गुरु01:2802:39रात
मंगल02:3903:51रात
सूर्य03:5105:02रात
शुक्र05:0206:14रात
बुध06:1407:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
13 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
1 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां वॉशिंगटन डी.सी. में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2067° (लाहिड़ी)। समय वॉशिंगटन डी.सी. (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।