गुरु (Guru (Brihaspati))

गुरु (बृहस्पति) देवताओं के गुरु और सबसे बड़े नैसर्गिक शुभ ग्रह हैं। ये ज्ञान, धर्म, संतान और सौभाग्य लाते हैं।

अभी गुरु कर्क 27° 41′ 37″ पर, आश्लेषा नक्षत्र में है।

गुरु किसका कारक है

  • ज्ञान और उच्च शिक्षा
  • संतान और गुरुजन
  • धन और भाग्य
  • लीवर और चर्बी

जब गुरु बलवान हो

बलवान गुरु अच्छी निर्णय-क्षमता, नैतिकता, समृद्धि और सम्मान देता है।

जब गुरु कमज़ोर हो

कमज़ोर गुरु गलत निर्णय, अति-आत्मविश्वास या संतान व गुरुजनों से जुड़ी बाधाएँ ला सकता है।

हर भाव में गुरु

रत्न केवल तभी पहनें जब कोई ज्योतिषी आपकी पूरी कुंडली देख ले — कठिन भावों के स्वामी ग्रह का रत्न नुकसान कर सकता है।