छठे भाव में गुरु ज्ञान के बल पर शत्रुओं पर विजय दिलाता है, पर वज़न, लीवर या शुगर से जुड़ी समस्याएँ दे सकता है; कानून, चिकित्सा और सेवा के लिए अच्छा।
षष्ठ भाव किसका कारक है
षष्ठ भाव, यानी रिपु भाव, शत्रु, प्रतिस्पर्धा, रोग, ऋण, सेवा और रोज़मर्रा का काम से जुड़ा है। यह उपचय (वृद्धि) भाव है, जहां समय और प्रयास के साथ परिणाम बेहतर होते हैं।
गुरु क्या देता है
गुरु (बृहस्पति) देवताओं के गुरु और सबसे बड़े नैसर्गिक शुभ ग्रह हैं। ये ज्ञान, धर्म, संतान और सौभाग्य लाते हैं।
परिणाम किन बातों से बदलता है
- राशि और अवस्था: गुरु उच्च या स्वराशि में हो तो इस स्थिति का सबसे अच्छा रूप मिलता है; नीच या शत्रु राशि में हो तो कमज़ोर रूप।
- भाव स्वामित्व: आपके लग्न के लिए गुरु किन भावों का स्वामी है, यह तय करता है कि वह षष्ठ भाव में किन मामलों को लेकर आता है।
- दृष्टि और युति: गुरु की दृष्टि रक्षा करती है; शनि, मंगल या राहु दबाव बढ़ाते हैं।
- दशा: यह स्थिति गुरु की अपनी महादशा या अंतर्दशा (16 वर्ष की महादशा) में सबसे अधिक फल देती है।