छठे भाव में सूर्य शत्रुओं और प्रतिद्वंद्वियों पर विजय के लिए बलवान स्थिति है। सरकारी सेवा, चिकित्सा और कानून के लिए अच्छा; रोग से जल्दी उबरना होता है और व्यक्ति दबाव अच्छी तरह संभालता है।
षष्ठ भाव किसका कारक है
षष्ठ भाव, यानी रिपु भाव, शत्रु, प्रतिस्पर्धा, रोग, ऋण, सेवा और रोज़मर्रा का काम से जुड़ा है। यह उपचय (वृद्धि) भाव है, जहां समय और प्रयास के साथ परिणाम बेहतर होते हैं।
सूर्य क्या देता है
सूर्य ग्रहों में राजा हैं और आत्मा के नैसर्गिक कारक (आत्मकारक) माने जाते हैं। ये जीवन-शक्ति, अधिकार, पिता और व्यक्ति के आत्मबोध का प्रतिनिधित्व करते हैं।
परिणाम किन बातों से बदलता है
- राशि और अवस्था: सूर्य उच्च या स्वराशि में हो तो इस स्थिति का सबसे अच्छा रूप मिलता है; नीच या शत्रु राशि में हो तो कमज़ोर रूप।
- भाव स्वामित्व: आपके लग्न के लिए सूर्य किन भावों का स्वामी है, यह तय करता है कि वह षष्ठ भाव में किन मामलों को लेकर आता है।
- दृष्टि और युति: गुरु की दृष्टि रक्षा करती है; शनि, मंगल या राहु दबाव बढ़ाते हैं।
- दशा: यह स्थिति सूर्य की अपनी महादशा या अंतर्दशा (6 वर्ष की महादशा) में सबसे अधिक फल देती है।