प्रथम भाव में सूर्य

लग्न (स्वयं) में सूर्य: सूर्य शरीर, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, रूप-रंग और जीवन की सामान्य दिशा को कैसे प्रभावित करता है।

लग्न में सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और स्वाभिमान देता है। स्वास्थ्य और ऊर्जा प्रायः अच्छी रहती है, पर स्वभाव गर्म और अधीर हो सकता है; व्यक्ति कमान अपने हाथ में रखना पसंद करता है और आसानी से लोगों की नज़र में आता है।

प्रथम भाव किसका कारक है

प्रथम भाव, यानी लग्न (स्वयं), शरीर, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, रूप-रंग और जीवन की सामान्य दिशा से जुड़ा है। यह केंद्र भाव है, कुंडली के स्तंभों में से एक।

सूर्य क्या देता है

सूर्य ग्रहों में राजा हैं और आत्मा के नैसर्गिक कारक (आत्मकारक) माने जाते हैं। ये जीवन-शक्ति, अधिकार, पिता और व्यक्ति के आत्मबोध का प्रतिनिधित्व करते हैं।

परिणाम किन बातों से बदलता है

  • राशि और अवस्था: सूर्य उच्च या स्वराशि में हो तो इस स्थिति का सबसे अच्छा रूप मिलता है; नीच या शत्रु राशि में हो तो कमज़ोर रूप।
  • भाव स्वामित्व: आपके लग्न के लिए सूर्य किन भावों का स्वामी है, यह तय करता है कि वह प्रथम भाव में किन मामलों को लेकर आता है।
  • दृष्टि और युति: गुरु की दृष्टि रक्षा करती है; शनि, मंगल या राहु दबाव बढ़ाते हैं।
  • दशा: यह स्थिति सूर्य की अपनी महादशा या अंतर्दशा (6 वर्ष की महादशा) में सबसे अधिक फल देती है।

देखें आपकी कुंडली में सूर्य कहां है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रथम भाव में सूर्य शुभ है या अशुभ?

यह इस पर निर्भर करता है कि सूर्य किस राशि में है, उसकी अवस्था क्या है, उस पर किन ग्रहों की दृष्टि है और कौन-सी दशा चल रही है। इसे राशि और प्रथम भाव के स्वामी की शक्ति के साथ मिलाकर देखें।

प्रथम भाव किसका प्रतिनिधित्व करता है?

प्रथम भाव (लग्न (स्वयं)) शरीर, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, रूप-रंग और जीवन की सामान्य दिशा का प्रतिनिधित्व करता है।

कैसे पता करें कि सूर्य किस भाव में है?

अपने सटीक जन्म समय और स्थान से मुफ़्त कुंडली बनाएं। भाव आपके लग्न से गिना जाता है; ग्रह टैब में हर ग्रह का भाव दिखाया जाता है।