चौथे भाव में सूर्य घर का माहौल औपचारिक या तनावपूर्ण बना सकता है और माता के स्वास्थ्य या संपत्ति विवाद की चिंता दे सकता है। सफलता अक्सर जन्मस्थान से दूर मिलती है; आयु के साथ मन की शांति बढ़ती है।
चतुर्थ भाव किसका कारक है
चतुर्थ भाव, यानी सुख भाव, माता, घर, संपत्ति, वाहन, मानसिक शांति और स्कूली शिक्षा से जुड़ा है। यह केंद्र भाव है, कुंडली के स्तंभों में से एक।
सूर्य क्या देता है
सूर्य ग्रहों में राजा हैं और आत्मा के नैसर्गिक कारक (आत्मकारक) माने जाते हैं। ये जीवन-शक्ति, अधिकार, पिता और व्यक्ति के आत्मबोध का प्रतिनिधित्व करते हैं।
परिणाम किन बातों से बदलता है
- राशि और अवस्था: सूर्य उच्च या स्वराशि में हो तो इस स्थिति का सबसे अच्छा रूप मिलता है; नीच या शत्रु राशि में हो तो कमज़ोर रूप।
- भाव स्वामित्व: आपके लग्न के लिए सूर्य किन भावों का स्वामी है, यह तय करता है कि वह चतुर्थ भाव में किन मामलों को लेकर आता है।
- दृष्टि और युति: गुरु की दृष्टि रक्षा करती है; शनि, मंगल या राहु दबाव बढ़ाते हैं।
- दशा: यह स्थिति सूर्य की अपनी महादशा या अंतर्दशा (6 वर्ष की महादशा) में सबसे अधिक फल देती है।