मृग नक्षत्र
मृगशीर्ष म्हणजे हरणाचे मस्तक; हे शोध घेणारे नक्षत्र आहे. ते जिज्ञासा, सौम्यता आणि कल्पना, ठिकाणे व माणसे जाणून घेण्याची अस्वस्थ ओढ देते.
वैशिष्ट्ये
- जिज्ञासू आणि सौम्य
- बोलके
- अस्वस्थ
- संशोधक वृत्तीचे
अनुकूल करिअर
- संशोधन
- प्रवास
- लेखन
- वस्त्र आणि अत्तर
चरण
| चरण | रास | विस्तार | नवांश | नावाचे अक्षर |
|---|
| 1 | वृषभ | 23° 20′ 00″ – 26° 40′ 00″ | सिंह | Ve |
| 2 | वृषभ | 26° 40′ 00″ – 30° 00′ 00″ | कन्या | Vo |
| 3 | मिथुन | 0° 00′ 00″ – 3° 20′ 00″ | तूळ | Ka |
| 4 | मिथुन | 3° 20′ 00″ – 6° 40′ 00″ | वृश्चिक | Ki |
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