11 अक्टूबर 2025 को अयोध्या का चौघड़िया

शनिवार, 11 अक्टूबर 2025, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 अक्टूबर 2025 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (16:44 तक), नक्षत्र रोहिणी (15:20 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 08:53 से 10:20 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:36
रात 05:59 तक
तिथि
पंचमी, 16:44 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रोहिणी, 15:20 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:58 – 07:25टालें
शुभ07:25 – 08:53शुभ
रोग08:53 – 10:20टालें
उद्वेग10:20 – 11:47टालें
चर11:47 – 13:15सामान्य
लाभ13:15 – 14:42शुभ
अमृत14:42 – 16:09शुभ
काल16:09 – 17:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:36 – 19:09शुभ
उद्वेग19:09 – 20:42टालें
शुभ20:42 – 22:15शुभ
अमृत22:15 – 23:48शुभ
चर23:48 – 01:20सामान्य
रोग01:20 – 02:53टालें
काल02:53 – 04:26टालें
लाभ04:26 – 05:59शुभ

11 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 16:44 तक
कृष्ण षष्ठी 14:17, 12 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 15:20 तक
मृगशिरा 13:36, 12 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 14:07 तक
वरीयान 10:55, 12 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 06:08 तक
तैतिल 16:43 तक
गर 03:26, 12 अक्टू॰ तक
वणिज 14:17, 12 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 02:24, 12 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
20:55
चंद्रास्त
10:32
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:11

अशुभ समय

राहुकाल
08:53 – 10:20
यमगंड
13:15 – 14:42
गुलिक काल
05:58 – 07:25

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5806:56दिन
गुरु06:5607:54दिन
मंगल07:5408:53दिन
सूर्य08:5309:51दिन
शुक्र09:5110:49दिन
बुध10:4911:47दिन
चंद्र11:4712:45दिन
शनि12:4513:44दिन
गुरु13:4414:42दिन
मंगल14:4215:40दिन
सूर्य15:4016:38दिन
शुक्र16:3817:36दिन
बुध17:3618:38रात
चंद्र18:3819:40रात
शनि19:4020:42रात
गुरु20:4221:44रात
मंगल21:4422:46रात
सूर्य22:4623:48रात
शुक्र23:4800:49रात
बुध00:4901:51रात
चंद्र01:5102:53रात
शनि02:5303:55रात
गुरु03:5504:57रात
मंगल04:5705:59रात

अयनांश 24.2171° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।