29 सितंबर 2027 को अयोध्या का चौघड़िया

बुधवार, 29 सितंबर 2027, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 सितंबर 2027 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (10:55 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (06:06 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 11:51 से 13:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 17:50
रात 05:53 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:55 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 04:00 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:52 – 07:22शुभ
अमृत07:22 – 08:52शुभ
काल08:52 – 10:21टालें
शुभ10:21 – 11:51शुभ
रोग11:51 – 13:21टालें
उद्वेग13:21 – 14:50टालें
चर14:50 – 16:20सामान्य
लाभ16:20 – 17:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:50 – 19:20टालें
शुभ19:20 – 20:51शुभ
अमृत20:51 – 22:21शुभ
चर22:21 – 23:51सामान्य
रोग23:51 – 01:22टालें
काल01:22 – 02:52टालें
लाभ02:52 – 04:22शुभ
उद्वेग04:22 – 05:53टालें

29 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 10:55 तक
अमावस्या 08:06, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 04:00, 30 सित॰ तक
हस्त 02:11, 1 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 00:26, 30 सित॰ तक
ब्रह्म 21:09, 30 सित॰ तक
करण
शकुनि 10:55 तक
चतुष्पद 21:29 तक
नाग 08:06, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 11:34 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
04:48
चंद्रास्त
17:08
दिनमान
11h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:15 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:51 – 13:21
यमगंड
07:22 – 08:52
गुलिक काल
10:21 – 11:51

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5206:52दिन
चंद्र06:5207:52दिन
शनि07:5208:52दिन
गुरु08:5209:51दिन
मंगल09:5110:51दिन
सूर्य10:5111:51दिन
शुक्र11:5112:51दिन
बुध12:5113:51दिन
चंद्र13:5114:50दिन
शनि14:5015:50दिन
गुरु15:5016:50दिन
मंगल16:5017:50दिन
सूर्य17:5018:50रात
शुक्र18:5019:50रात
बुध19:5020:51रात
चंद्र20:5121:51रात
शनि21:5122:51रात
गुरु22:5123:51रात
मंगल23:5100:51रात
सूर्य00:5101:52रात
शुक्र01:5202:52रात
बुध02:5203:52रात
चंद्र03:5204:52रात
शनि04:5205:53रात

अयनांश 24.2446° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।