15 अक्टूबर 2025 को बर्धमान का चौघड़िया

बुधवार, 15 अक्टूबर 2025, बर्धमान, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 15 अक्टूबर 2025 को बर्धमान में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (10:34 तक), नक्षत्र पुष्य (12:00 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 11:24 से 12:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 17:12
रात 05:35 तक
तिथि
नवमी, 10:34 तक
दशमी
नक्षत्र
पुष्य, 12:00 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:35 – 07:02शुभ
अमृत07:02 – 08:29शुभ
काल08:29 – 09:57टालें
शुभ09:57 – 11:24शुभ
रोग11:24 – 12:51टालें
उद्वेग12:51 – 14:18टालें
चर14:18 – 15:45सामान्य
लाभ15:45 – 17:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:12 – 18:45टालें
शुभ18:45 – 20:18शुभ
अमृत20:18 – 21:51शुभ
चर21:51 – 23:24सामान्य
रोग23:24 – 00:57टालें
काल00:57 – 02:30टालें
लाभ02:30 – 04:03शुभ
उद्वेग04:03 – 05:35टालें

15 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण नवमी 10:34 तक
कृष्ण दशमी 10:36, 16 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 12:00 तक
आश्लेषा 12:42, 16 अक्टू॰ तक
योग
साध्य 02:57, 16 अक्टू॰ तक
शुभ 02:10, 17 अक्टू॰ तक
करण
गर 10:34 तक
वणिज 22:30 तक
विष्टि (भद्रा) 10:36, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:38
दिनमान
11h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:47 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:24 – 12:51
यमगंड
07:02 – 08:29
गुलिक काल
09:57 – 11:24

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3506:33दिन
चंद्र06:3307:31दिन
शनि07:3108:29दिन
गुरु08:2909:27दिन
मंगल09:2710:26दिन
सूर्य10:2611:24दिन
शुक्र11:2412:22दिन
बुध12:2213:20दिन
चंद्र13:2014:18दिन
शनि14:1815:16दिन
गुरु15:1616:14दिन
मंगल16:1417:12दिन
सूर्य17:1218:14रात
शुक्र18:1419:16रात
बुध19:1620:18रात
चंद्र20:1821:20रात
शनि21:2022:22रात
गुरु22:2223:24रात
मंगल23:2400:26रात
सूर्य00:2601:28रात
शुक्र01:2802:30रात
बुध02:3003:32रात
चंद्र03:3204:34रात
शनि04:3405:35रात

अयनांश 24.2173° (लाहिड़ी)। समय बर्धमान (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।