17 नवंबर 2026 को बर्धमान का चौघड़िया

मंगलवार, 17 नवंबर 2026, बर्धमान, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 17 नवंबर 2026 को बर्धमान में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (06:05, 18 नव॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (04:34, 18 नव॰ तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 16:53 पर है। राहुकाल 14:08 से 15:30 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 16:53
रात 05:54 तक
तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 04:34 तक
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:53 – 07:15टालें
उद्वेग07:15 – 08:38टालें
चर08:38 – 10:00सामान्य
लाभ10:00 – 11:23शुभ
अमृत11:23 – 12:45शुभ
काल12:45 – 14:08टालें
शुभ14:08 – 15:30शुभ
रोग15:30 – 16:53टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:53 – 18:30टालें
लाभ18:30 – 20:08शुभ
उद्वेग20:08 – 21:46टालें
शुभ21:46 – 23:23शुभ
अमृत23:23 – 01:01शुभ
चर01:01 – 02:38सामान्य
रोग02:38 – 04:16टालें
काल04:16 – 05:54टालें

17 नवंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 06:05, 18 नव॰ तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 04:34, 18 नव॰ तक
शतभिषा 06:10, 19 नव॰ तक
योग
वृद्धि 07:54 तक
ध्रुव 08:05, 18 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 17:17 तक
बव 06:05, 18 नव॰ तक
चंद्र राशि
मकर 15:30 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
16:53
चंद्रोदय
11:58
चंद्रास्त
23:31
दिनमान
11h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
11:01 – 11:45

अशुभ समय

राहुकाल
14:08 – 15:30
यमगंड
08:38 – 10:00
गुलिक काल
11:23 – 12:45

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5306:48दिन
सूर्य06:4807:43दिन
शुक्र07:4308:38दिन
बुध08:3809:33दिन
चंद्र09:3310:28दिन
शनि10:2811:23दिन
गुरु11:2312:18दिन
मंगल12:1813:13दिन
सूर्य13:1314:08दिन
शुक्र14:0815:03दिन
बुध15:0315:58दिन
चंद्र15:5816:53दिन
शनि16:5317:58रात
गुरु17:5819:03रात
मंगल19:0320:08रात
सूर्य20:0821:13रात
शुक्र21:1322:18रात
बुध22:1823:23रात
चंद्र23:2300:28रात
शनि00:2801:33रात
गुरु01:3302:38रात
मंगल02:3803:43रात
सूर्य03:4304:49रात
शुक्र04:4905:54रात

अयनांश 24.2325° (लाहिड़ी)। समय बर्धमान (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।