22 जनवरी 2025 को द्वारका का चौघड़िया

बुधवार, 22 जनवरी 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 22 जनवरी 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (15:18 तक), नक्षत्र स्वाति (02:34, 23 जन॰ तक) और योग शूल है। सूर्योदय 07:35 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 13:05 से 14:28 तक है।

दिन और रात
दिन 07:35 – 18:36
रात 07:35 तक
तिथि
अष्टमी, 15:18 तक
नवमी
नक्षत्र
स्वाति, 02:34 तक
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:35 – 08:57शुभ
अमृत08:57 – 10:20शुभ
काल10:20 – 11:43टालें
शुभ11:43 – 13:05शुभ
रोग13:05 – 14:28टालें
उद्वेग14:28 – 15:51टालें
चर15:51 – 17:13सामान्य
लाभ17:13 – 18:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:36 – 20:13टालें
शुभ20:13 – 21:50शुभ
अमृत21:50 – 23:28शुभ
चर23:28 – 01:05सामान्य
रोग01:05 – 02:43टालें
काल02:43 – 04:20टालें
लाभ04:20 – 05:57शुभ
उद्वेग05:57 – 07:35टालें

22 जनवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 15:18 तक
कृष्ण नवमी 17:38, 23 जन॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 02:34, 23 जन॰ तक
विशाखा 05:08, 24 जन॰ तक
योग
शूलअशुभ 04:37, 23 जन॰ तक
गंडअशुभ 05:06, 24 जन॰ तक
करण
कौलव 15:18 तक
तैतिल 04:31, 23 जन॰ तक
गर 17:38, 23 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:35
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
01:07
चंद्रास्त
12:32
दिनमान
11h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:43
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:27 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:05 – 14:28
यमगंड
08:57 – 10:20
गुलिक काल
11:43 – 13:05

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:3508:30दिन
चंद्र08:3009:25दिन
शनि09:2510:20दिन
गुरु10:2011:15दिन
मंगल11:1512:10दिन
सूर्य12:1013:05दिन
शुक्र13:0514:00दिन
बुध14:0014:55दिन
चंद्र14:5515:51दिन
शनि15:5116:46दिन
गुरु16:4617:41दिन
मंगल17:4118:36दिन
सूर्य18:3619:41रात
शुक्र19:4120:46रात
बुध20:4621:50रात
चंद्र21:5022:55रात
शनि22:5500:00रात
गुरु00:0001:05रात
मंगल01:0502:10रात
सूर्य02:1003:15रात
शुक्र03:1504:20रात
बुध04:2005:25रात
चंद्र05:2506:30रात
शनि06:3007:35रात

अयनांश 24.2071° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।