19 मार्च 2025 को द्वारका का चौघड़िया

बुधवार, 19 मार्च 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 मार्च 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (00:37, 20 मार्च तक), नक्षत्र विशाखा (20:50 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 19:04 पर है। राहुकाल 13:02 से 14:32 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 19:04
रात 06:58 तक
तिथि
पंचमी, 00:37 तक
षष्ठी
नक्षत्र
विशाखा, 20:50 तक
अनुराधा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:59 – 08:29शुभ
अमृत08:29 – 10:00शुभ
काल10:00 – 11:31टालें
शुभ11:31 – 13:02शुभ
रोग13:02 – 14:32टालें
उद्वेग14:32 – 16:03टालें
चर16:03 – 17:34सामान्य
लाभ17:34 – 19:04शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:04 – 20:34टालें
शुभ20:34 – 22:03शुभ
अमृत22:03 – 23:32शुभ
चर23:32 – 01:01सामान्य
रोग01:01 – 02:30टालें
काल02:30 – 03:59टालें
लाभ03:59 – 05:29शुभ
उद्वेग05:29 – 06:58टालें

19 मार्च 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 00:37, 20 मार्च तक
कृष्ण षष्ठी 02:45, 21 मार्च तक
नक्षत्र
विशाखा 20:50 तक
अनुराधा 23:31, 20 मार्च तक
योग
हर्षण 17:37 तक
वज्रअशुभ 18:19, 20 मार्च तक
करण
कौलव 11:25 तक
तैतिल 00:37, 20 मार्च तक
गर 13:44, 20 मार्च तक
चंद्र राशि
तुला 14:06 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
19:04
चंद्रोदय
23:29
चंद्रास्त
09:40
दिनमान
12h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:26 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:02 – 14:32
यमगंड
08:29 – 10:00
गुलिक काल
11:31 – 13:02

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5907:59दिन
चंद्र07:5909:00दिन
शनि09:0010:00दिन
गुरु10:0011:01दिन
मंगल11:0112:01दिन
सूर्य12:0113:02दिन
शुक्र13:0214:02दिन
बुध14:0215:02दिन
चंद्र15:0216:03दिन
शनि16:0317:03दिन
गुरु17:0318:04दिन
मंगल18:0419:04दिन
सूर्य19:0420:04रात
शुक्र20:0421:03रात
बुध21:0322:03रात
चंद्र22:0323:02रात
शनि23:0200:02रात
गुरु00:0201:01रात
मंगल01:0102:00रात
सूर्य02:0003:00रात
शुक्र03:0003:59रात
बुध03:5904:59रात
चंद्र04:5905:58रात
शनि05:5806:58रात

अयनांश 24.2093° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।