6 सितंबर 2025 को द्वारका का चौघड़िया

शनिवार, 6 सितंबर 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 6 सितंबर 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (01:41, 7 सित॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (22:55 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 09:45 से 11:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 19:06
रात 06:38 तक
तिथि
चतुर्दशी, 01:41 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
धनिष्ठा, 22:55 तक
शतभिषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:38 – 08:11टालें
शुभ08:11 – 09:45शुभ
रोग09:45 – 11:18टालें
उद्वेग11:18 – 12:52टालें
चर12:52 – 14:25सामान्य
लाभ14:25 – 15:59शुभ
अमृत15:59 – 17:32शुभ
काल17:32 – 19:06टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:06 – 20:32शुभ
उद्वेग20:32 – 21:59टालें
शुभ21:59 – 23:25शुभ
अमृत23:25 – 00:52शुभ
चर00:52 – 02:19सामान्य
रोग02:19 – 03:45टालें
काल03:45 – 05:12टालें
लाभ05:12 – 06:38शुभ

6 सितंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 01:41, 7 सित॰ तक
पूर्णिमा 23:38, 7 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 21:41, 7 सित॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 11:51 तक
सुकर्मा 09:22, 7 सित॰ तक
करण
गर 14:31 तक
वणिज 01:41, 7 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:43, 7 सित॰ तक
चंद्र राशि
मकर 11:21 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
18:18
चंद्रास्त
04:58
दिनमान
12h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
12:27 – 13:17

अशुभ समय

राहुकाल
09:45 – 11:18
यमगंड
14:25 – 15:59
गुलिक काल
06:38 – 08:11

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3807:40दिन
गुरु07:4008:43दिन
मंगल08:4309:45दिन
सूर्य09:4510:47दिन
शुक्र10:4711:50दिन
बुध11:5012:52दिन
चंद्र12:5213:54दिन
शनि13:5414:56दिन
गुरु14:5615:59दिन
मंगल15:5917:01दिन
सूर्य17:0118:03दिन
शुक्र18:0319:06दिन
बुध19:0620:03रात
चंद्र20:0321:01रात
शनि21:0121:59रात
गुरु21:5922:57रात
मंगल22:5723:54रात
सूर्य23:5400:52रात
शुक्र00:5201:50रात
बुध01:5002:47रात
चंद्र02:4703:45रात
शनि03:4504:43रात
गुरु04:4305:41रात
मंगल05:4106:38रात

अयनांश 24.2158° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।