6 अक्टूबर 2026 को द्वारका का चौघड़िया

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (00:34, 7 अक्टू॰ तक), नक्षत्र आश्लेषा (22:17 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 15:39 से 17:08 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 18:37
रात 06:47 तक
तिथि
एकादशी, 00:34 तक
द्वादशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 22:17 तक
मघा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:47 – 08:15टालें
उद्वेग08:15 – 09:44टालें
चर09:44 – 11:13सामान्य
लाभ11:13 – 12:42शुभ
अमृत12:42 – 14:10शुभ
काल14:10 – 15:39टालें
शुभ15:39 – 17:08शुभ
रोग17:08 – 18:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:37 – 20:08टालें
लाभ20:08 – 21:39शुभ
उद्वेग21:39 – 23:11टालें
शुभ23:11 – 00:42शुभ
अमृत00:42 – 02:13शुभ
चर02:13 – 03:44सामान्य
रोग03:44 – 05:16टालें
काल05:16 – 06:47टालें

6 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 00:34, 7 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वादशी 23:17, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 21:40, 7 अक्टू॰ तक
योग
सिद्ध 07:20 तक
साध्य 05:00, 7 अक्टू॰ तक
शुभ 02:52, 8 अक्टू॰ तक
करण
बव 13:19 तक
बालव 00:34, 7 अक्टू॰ तक
कौलव 11:53, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 22:17 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
02:28
चंद्रास्त
15:51
दिनमान
11h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:18 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
15:39 – 17:08
यमगंड
09:44 – 11:13
गुलिक काल
12:42 – 14:10

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4707:46दिन
सूर्य07:4608:45दिन
शुक्र08:4509:44दिन
बुध09:4410:43दिन
चंद्र10:4311:42दिन
शनि11:4212:42दिन
गुरु12:4213:41दिन
मंगल13:4114:40दिन
सूर्य14:4015:39दिन
शुक्र15:3916:38दिन
बुध16:3817:38दिन
चंद्र17:3818:37दिन
शनि18:3719:38रात
गुरु19:3820:38रात
मंगल20:3821:39रात
सूर्य21:3922:40रात
शुक्र22:4023:41रात
बुध23:4100:42रात
चंद्र00:4201:43रात
शनि01:4302:44रात
गुरु02:4403:44रात
मंगल03:4404:45रात
सूर्य04:4505:46रात
शुक्र05:4606:47रात

अयनांश 24.2309° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।