17 मार्च 2027 को द्वारका का चौघड़िया

बुधवार, 17 मार्च 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 17 मार्च 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (04:21, 18 मार्च तक), नक्षत्र पुनर्वसु (05:07, 18 मार्च तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:01 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 13:02 से 14:33 तक है।

दिन और रात
दिन 07:01 – 19:03
रात 07:00 तक
तिथि
दशमी, 04:21 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 05:07 तक
पुष्य
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:01 – 08:31शुभ
अमृत08:31 – 10:02शुभ
काल10:02 – 11:32टालें
शुभ11:32 – 13:02शुभ
रोग13:02 – 14:33टालें
उद्वेग14:33 – 16:03टालें
चर16:03 – 17:33सामान्य
लाभ17:33 – 19:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:03 – 20:33टालें
शुभ20:33 – 22:03शुभ
अमृत22:03 – 23:32शुभ
चर23:32 – 01:02सामान्य
रोग01:02 – 02:31टालें
काल02:31 – 04:01टालें
लाभ04:01 – 05:31शुभ
उद्वेग05:31 – 07:00टालें

17 मार्च 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 04:21, 18 मार्च तक
शुक्ल एकादशी 01:51, 19 मार्च तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 05:07, 18 मार्च तक
पुष्य 03:21, 19 मार्च तक
योग
सौभाग्य 08:53 तक
शोभन 05:47, 18 मार्च तक
अतिगंडअशुभ 02:34, 19 मार्च तक
करण
तैतिल 17:34 तक
गर 04:21, 18 मार्च तक
वणिज 15:07, 18 मार्च तक
चंद्र राशि
मिथुन 23:33 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:01
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
13:54
चंद्रास्त
02:55
दिनमान
12h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:13
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:26 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:02 – 14:33
यमगंड
08:31 – 10:02
गुलिक काल
11:32 – 13:02

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0108:01दिन
चंद्र08:0109:01दिन
शनि09:0110:02दिन
गुरु10:0211:02दिन
मंगल11:0212:02दिन
सूर्य12:0213:02दिन
शुक्र13:0214:02दिन
बुध14:0215:03दिन
चंद्र15:0316:03दिन
शनि16:0317:03दिन
गुरु17:0318:03दिन
मंगल18:0319:03दिन
सूर्य19:0320:03रात
शुक्र20:0321:03रात
बुध21:0322:03रात
चंद्र22:0323:02रात
शनि23:0200:02रात
गुरु00:0201:02रात
मंगल01:0202:01रात
सूर्य02:0103:01रात
शुक्र03:0104:01रात
बुध04:0105:01रात
चंद्र05:0106:00रात
शनि06:0007:00रात

अयनांश 24.2371° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।