19 अप्रैल 2027 को द्वारका का चौघड़िया

सोमवार, 19 अप्रैल 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 19 अप्रैल 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (04:51, 20 अप्रैल तक), नक्षत्र हस्त (04:40, 20 अप्रैल तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:31 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 08:06 से 09:42 तक है।

दिन और रात
दिन 06:31 – 19:15
रात 06:30 तक
तिथि
चतुर्दशी, 04:51 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
हस्त, 04:40 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:31 – 08:06शुभ
काल08:06 – 09:42टालें
शुभ09:42 – 11:17शुभ
रोग11:17 – 12:53टालें
उद्वेग12:53 – 14:29टालें
चर14:29 – 16:04सामान्य
लाभ16:04 – 17:40शुभ
अमृत17:40 – 19:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:15 – 20:39सामान्य
रोग20:39 – 22:04टालें
काल22:04 – 23:28टालें
लाभ23:28 – 00:53शुभ
उद्वेग00:53 – 02:17टालें
शुभ02:17 – 03:41शुभ
अमृत03:41 – 05:06शुभ
चर05:06 – 06:30सामान्य

19 अप्रैल 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 04:51, 20 अप्रैल तक
पूर्णिमा 03:57, 21 अप्रैल तक
नक्षत्र
हस्त 04:40, 20 अप्रैल तक
चित्रा 04:28, 21 अप्रैल तक
योग
व्याघातअशुभ 19:44 तक
हर्षण 17:47, 20 अप्रैल तक
करण
गर 17:27 तक
वणिज 04:51, 20 अप्रैल तक
विष्टि (भद्रा) 16:21, 20 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:31
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
17:54
चंद्रास्त
05:07
दिनमान
12h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:01 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:18

अशुभ समय

राहुकाल
08:06 – 09:42
यमगंड
11:17 – 12:53
गुलिक काल
14:29 – 16:04

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3107:35दिन
शनि07:3508:38दिन
गुरु08:3809:42दिन
मंगल09:4210:46दिन
सूर्य10:4611:49दिन
शुक्र11:4912:53दिन
बुध12:5313:57दिन
चंद्र13:5715:00दिन
शनि15:0016:04दिन
गुरु16:0417:08दिन
मंगल17:0818:11दिन
सूर्य18:1119:15दिन
शुक्र19:1520:11रात
बुध20:1121:08रात
चंद्र21:0822:04रात
शनि22:0423:00रात
गुरु23:0023:56रात
मंगल23:5600:53रात
सूर्य00:5301:49रात
शुक्र01:4902:45रात
बुध02:4503:41रात
चंद्र03:4104:38रात
शनि04:3805:34रात
गुरु05:3406:30रात

अयनांश 24.2384° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।