4 सितंबर 2027 को द्वारका का चौघड़िया

शनिवार, 4 सितंबर 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 4 सितंबर 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (12:26 तक), नक्षत्र चित्रा (14:49 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 09:45 से 11:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 19:08
रात 06:38 तक
तिथि
चतुर्थी, 12:26 तक
पंचमी
नक्षत्र
चित्रा, 14:49 तक
स्वाति
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:37 – 08:11टालें
शुभ08:11 – 09:45शुभ
रोग09:45 – 11:19टालें
उद्वेग11:19 – 12:53टालें
चर12:53 – 14:26सामान्य
लाभ14:26 – 16:00शुभ
अमृत16:00 – 17:34शुभ
काल17:34 – 19:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:08 – 20:34शुभ
उद्वेग20:34 – 22:00टालें
शुभ22:00 – 23:27शुभ
अमृत23:27 – 00:53शुभ
चर00:53 – 02:19सामान्य
रोग02:19 – 03:45टालें
काल03:45 – 05:11टालें
लाभ05:11 – 06:38शुभ

4 सितंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 12:26 तक
शुक्ल पंचमी 11:17, 5 सित॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 14:49 तक
स्वाति 14:30, 5 सित॰ तक
योग
शुक्ल 08:14 तक
ब्रह्म 06:06, 5 सित॰ तक
इंद्र 04:37, 6 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:26 तक
बव 23:46 तक
बालव 11:17, 5 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
10:05
चंद्रास्त
21:31
दिनमान
12h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:18

अशुभ समय

राहुकाल
09:45 – 11:19
यमगंड
14:26 – 16:00
गुलिक काल
06:37 – 08:11

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3707:40दिन
गुरु07:4008:42दिन
मंगल08:4209:45दिन
सूर्य09:4510:48दिन
शुक्र10:4811:50दिन
बुध11:5012:53दिन
चंद्र12:5313:55दिन
शनि13:5514:58दिन
गुरु14:5816:00दिन
मंगल16:0017:03दिन
सूर्य17:0318:05दिन
शुक्र18:0519:08दिन
बुध19:0820:06रात
चंद्र20:0621:03रात
शनि21:0322:00रात
गुरु22:0022:58रात
मंगल22:5823:55रात
सूर्य23:5500:53रात
शुक्र00:5301:50रात
बुध01:5002:48रात
चंद्र02:4803:45रात
शनि03:4504:43रात
गुरु04:4305:40रात
मंगल05:4006:38रात

अयनांश 24.2436° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।