28 सितंबर 2027 को द्वारका का चौघड़िया

मंगलवार, 28 सितंबर 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 28 सितंबर 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:55 तक), नक्षत्र मघा (08:20 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 15:44 से 17:14 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 18:45
रात 06:44 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:55 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 06:06 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:44 – 08:14टालें
उद्वेग08:14 – 09:44टालें
चर09:44 – 11:14सामान्य
लाभ11:14 – 12:44शुभ
अमृत12:44 – 14:14शुभ
काल14:14 – 15:44टालें
शुभ15:44 – 17:14शुभ
रोग17:14 – 18:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:45 – 20:15टालें
लाभ20:15 – 21:44शुभ
उद्वेग21:44 – 23:14टालें
शुभ23:14 – 00:44शुभ
अमृत00:44 – 02:14शुभ
चर02:14 – 03:44सामान्य
रोग03:44 – 05:14टालें
काल05:14 – 06:44टालें

28 सितंबर 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:55 तक
कृष्ण चतुर्दशी 10:55, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 08:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी 06:06, 29 सित॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 04:00, 30 सित॰ तक
योग
साध्य 07:32 तक
शुभ 03:56, 29 सित॰ तक
शुक्ल 00:26, 30 सित॰ तक
करण
वणिज 13:55 तक
विष्टि (भद्रा) 00:24, 29 सित॰ तक
शकुनि 10:55, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
04:41
चंद्रास्त
17:25
दिनमान
12h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 05:56
अभिजीत मुहूर्त
12:20 – 13:08

अशुभ समय

राहुकाल
15:44 – 17:14
यमगंड
09:44 – 11:14
गुलिक काल
12:44 – 14:14

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4407:44दिन
सूर्य07:4408:44दिन
शुक्र08:4409:44दिन
बुध09:4410:44दिन
चंद्र10:4411:44दिन
शनि11:4412:44दिन
गुरु12:4413:44दिन
मंगल13:4414:44दिन
सूर्य14:4415:44दिन
शुक्र15:4416:44दिन
बुध16:4417:44दिन
चंद्र17:4418:45दिन
शनि18:4519:45रात
गुरु19:4520:44रात
मंगल20:4421:44रात
सूर्य21:4422:44रात
शुक्र22:4423:44रात
बुध23:4400:44रात
चंद्र00:4401:44रात
शनि01:4402:44रात
गुरु02:4403:44रात
मंगल03:4404:44रात
सूर्य04:4405:44रात
शुक्र05:4406:44रात

अयनांश 24.2446° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।