29 सितंबर 2027 को द्वारका का चौघड़िया

बुधवार, 29 सितंबर 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 सितंबर 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (10:55 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (04:00, 30 सित॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 12:44 से 14:14 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 18:44
रात 06:45 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:55 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 04:00 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:44 – 08:14शुभ
अमृत08:14 – 09:44शुभ
काल09:44 – 11:14टालें
शुभ11:14 – 12:44शुभ
रोग12:44 – 14:14टालें
उद्वेग14:14 – 15:44टालें
चर15:44 – 17:14सामान्य
लाभ17:14 – 18:44शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:44 – 20:14टालें
शुभ20:14 – 21:44शुभ
अमृत21:44 – 23:14शुभ
चर23:14 – 00:44सामान्य
रोग00:44 – 02:14टालें
काल02:14 – 03:44टालें
लाभ03:44 – 05:14शुभ
उद्वेग05:14 – 06:45टालें

29 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 10:55 तक
अमावस्या 08:06, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 04:00, 30 सित॰ तक
हस्त 02:11, 1 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 00:26, 30 सित॰ तक
ब्रह्म 21:09, 30 सित॰ तक
करण
शकुनि 10:55 तक
चतुष्पद 21:29 तक
नाग 08:06, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 11:34 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
05:44
चंद्रास्त
18:04
दिनमान
11h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 05:56
अभिजीत मुहूर्त
12:20 – 13:08 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:44 – 14:14
यमगंड
08:14 – 09:44
गुलिक काल
11:14 – 12:44

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4407:44दिन
चंद्र07:4408:44दिन
शनि08:4409:44दिन
गुरु09:4410:44दिन
मंगल10:4411:44दिन
सूर्य11:4412:44दिन
शुक्र12:4413:44दिन
बुध13:4414:44दिन
चंद्र14:4415:44दिन
शनि15:4416:44दिन
गुरु16:4417:44दिन
मंगल17:4418:44दिन
सूर्य18:4419:44रात
शुक्र19:4420:44रात
बुध20:4421:44रात
चंद्र21:4422:44रात
शनि22:4423:44रात
गुरु23:4400:44रात
मंगल00:4401:44रात
सूर्य01:4402:44रात
शुक्र02:4403:44रात
बुध03:4404:44रात
चंद्र04:4405:44रात
शनि05:4406:45रात

अयनांश 24.2446° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।