25 सितंबर 2044 को कोलकाता का चौघड़िया

रविवार, 25 सितंबर 2044, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 25 सितंबर 2044 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (14:46 तक), नक्षत्र विशाखा (03:55, 26 सित॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 15:59 से 17:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 17:29
रात 05:26 तक
तिथि
चतुर्थी, 14:46 तक
पंचमी
नक्षत्र
विशाखा, 03:55 तक
अनुराधा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 सितंबर 2044 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:26 – 06:56टालें
चर06:56 – 08:27सामान्य
लाभ08:27 – 09:57शुभ
अमृत09:57 – 11:27शुभ
काल11:27 – 12:58टालें
शुभ12:58 – 14:28शुभ
रोग14:28 – 15:59टालें
उद्वेग15:59 – 17:29टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:29 – 18:59शुभ
अमृत18:59 – 20:28शुभ
चर20:28 – 21:58सामान्य
रोग21:58 – 23:28टालें
काल23:28 – 00:57टालें
लाभ00:57 – 02:27शुभ
उद्वेग02:27 – 03:56टालें
शुभ03:56 – 05:26शुभ

25 सितंबर 2044 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 14:46 तक
शुक्ल पंचमी 15:54, 26 सित॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 03:55, 26 सित॰ तक
अनुराधा 05:58, 27 सित॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 06:02 तक
विष्कंभअशुभ 05:42, 26 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:46 तक
बव 03:15, 26 सित॰ तक
बालव 15:54, 26 सित॰ तक
चंद्र राशि
तुला 21:30 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
08:52
चंद्रास्त
19:53
दिनमान
12h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2101
शक संवत
1966, रक्ताक्षी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:52

अशुभ समय

राहुकाल
15:59 – 17:29
यमगंड
11:27 – 12:58
गुलिक काल
14:28 – 15:59

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2606:26दिन
शुक्र06:2607:26दिन
बुध07:2608:27दिन
चंद्र08:2709:27दिन
शनि09:2710:27दिन
गुरु10:2711:27दिन
मंगल11:2712:28दिन
सूर्य12:2813:28दिन
शुक्र13:2814:28दिन
बुध14:2815:29दिन
चंद्र15:2916:29दिन
शनि16:2917:29दिन
गुरु17:2918:29रात
मंगल18:2919:29रात
सूर्य19:2920:28रात
शुक्र20:2821:28रात
बुध21:2822:28रात
चंद्र22:2823:28रात
शनि23:2800:27रात
गुरु00:2701:27रात
मंगल01:2702:27रात
सूर्य02:2703:27रात
शुक्र03:2704:26रात
बुध04:2605:26रात

अयनांश 24.4820° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।