30 अक्टूबर 2002 को पटना का चौघड़िया

बुधवार, 30 अक्टूबर 2002, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 30 अक्टूबर 2002 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (21:00 तक), नक्षत्र आश्लेषा (19:03 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 17:09 पर है। राहुकाल 11:32 से 12:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 17:09
रात 05:56 तक
तिथि
नवमी, 21:00 तक
दशमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 19:03 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अक्टूबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:56 – 07:20शुभ
अमृत07:20 – 08:44शुभ
काल08:44 – 10:08टालें
शुभ10:08 – 11:32शुभ
रोग11:32 – 12:57टालें
उद्वेग12:57 – 14:21टालें
चर14:21 – 15:45सामान्य
लाभ15:45 – 17:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:09 – 18:45टालें
शुभ18:45 – 20:21शुभ
अमृत20:21 – 21:57शुभ
चर21:57 – 23:33सामान्य
रोग23:33 – 01:09टालें
काल01:09 – 02:44टालें
लाभ02:44 – 04:20शुभ
उद्वेग04:20 – 05:56टालें

30 अक्टूबर 2002 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण नवमी 21:00 तक
कृष्ण दशमी 18:51, 31 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 17:39, 31 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 08:43 तक
शुक्ल 06:07, 31 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 09:50 तक
गर 21:00 तक
वणिज 08:00, 31 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 19:03 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
17:09
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:32
दिनमान
11h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:32 – 12:57
यमगंड
07:20 – 08:44
गुलिक काल
10:08 – 11:32

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5606:52दिन
चंद्र06:5207:48दिन
शनि07:4808:44दिन
गुरु08:4409:40दिन
मंगल09:4010:36दिन
सूर्य10:3611:32दिन
शुक्र11:3212:29दिन
बुध12:2913:25दिन
चंद्र13:2514:21दिन
शनि14:2115:17दिन
गुरु15:1716:13दिन
मंगल16:1317:09दिन
सूर्य17:0918:13रात
शुक्र18:1319:17रात
बुध19:1720:21रात
चंद्र20:2121:25रात
शनि21:2522:29रात
गुरु22:2923:33रात
मंगल23:3300:37रात
सूर्य00:3701:41रात
शुक्र01:4102:44रात
बुध02:4403:48रात
चंद्र03:4804:52रात
शनि04:5205:56रात

अयनांश 23.8965° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।