14 सितंबर 2025 को प्रयागराज का चौघड़िया

रविवार, 14 सितंबर 2025, प्रयागराज, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 14 सितंबर 2025 को प्रयागराज में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (03:06, 15 सित॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (08:41 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 16:35 से 18:07 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 18:07
रात 05:48 तक
तिथि
अष्टमी, 03:06 तक
नवमी
नक्षत्र
रोहिणी, 08:41 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:48 – 07:20टालें
चर07:20 – 08:53सामान्य
लाभ08:53 – 10:25शुभ
अमृत10:25 – 11:57शुभ
काल11:57 – 13:30टालें
शुभ13:30 – 15:02शुभ
रोग15:02 – 16:35टालें
उद्वेग16:35 – 18:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:07 – 19:35शुभ
अमृत19:35 – 21:03शुभ
चर21:03 – 22:30सामान्य
रोग22:30 – 23:58टालें
काल23:58 – 01:25टालें
लाभ01:25 – 02:53शुभ
उद्वेग02:53 – 04:20टालें
शुभ04:20 – 05:48शुभ

14 सितंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 03:06, 15 सित॰ तक
कृष्ण नवमी 01:31, 16 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 08:41 तक
मृगशिरा 07:31, 15 सित॰ तक
योग
वज्रअशुभ 07:35 तक
सिद्धि 04:55, 15 सित॰ तक
व्यतीपातअशुभ 02:34, 16 सित॰ तक
करण
बालव 16:02 तक
कौलव 03:06, 15 सित॰ तक
तैतिल 14:16, 15 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:03 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
23:09
चंद्रास्त
12:41
दिनमान
12h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
16:35 – 18:07
यमगंड
11:57 – 13:30
गुलिक काल
15:02 – 16:35

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4806:49दिन
शुक्र06:4907:51दिन
बुध07:5108:53दिन
चंद्र08:5309:54दिन
शनि09:5410:56दिन
गुरु10:5611:57दिन
मंगल11:5712:59दिन
सूर्य12:5914:01दिन
शुक्र14:0115:02दिन
बुध15:0216:04दिन
चंद्र16:0417:06दिन
शनि17:0618:07दिन
गुरु18:0719:06रात
मंगल19:0620:04रात
सूर्य20:0421:03रात
शुक्र21:0322:01रात
बुध22:0122:59रात
चंद्र22:5923:58रात
शनि23:5800:56रात
गुरु00:5601:54रात
मंगल01:5402:53रात
सूर्य02:5303:51रात
शुक्र03:5104:50रात
बुध04:5005:48रात

अयनांश 24.2161° (लाहिड़ी)। समय प्रयागराज (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।