24 अप्रैल 2025 को पुष्कर का चौघड़िया

गुरुवार, 24 अप्रैल 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 24 अप्रैल 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (14:32 तक), नक्षत्र शतभिषा (10:49 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 19:00 पर है। राहुकाल 14:07 से 15:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 19:00
रात 05:59 तक
तिथि
एकादशी, 14:32 तक
द्वादशी
नक्षत्र
शतभिषा, 10:49 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:59 – 07:37शुभ
रोग07:37 – 09:15टालें
उद्वेग09:15 – 10:52टालें
चर10:52 – 12:30सामान्य
लाभ12:30 – 14:07शुभ
अमृत14:07 – 15:45शुभ
काल15:45 – 17:22टालें
शुभ17:22 – 19:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:00 – 20:22शुभ
चर20:22 – 21:44सामान्य
रोग21:44 – 23:07टालें
काल23:07 – 00:29टालें
लाभ00:29 – 01:52शुभ
उद्वेग01:52 – 03:14टालें
शुभ03:14 – 04:36शुभ
अमृत04:36 – 05:59शुभ

24 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 14:32 तक
कृष्ण द्वादशी 11:45, 25 अप्रैल तक
नक्षत्र
शतभिषा 10:49 तक
पूर्वा भाद्रपद 08:53, 25 अप्रैल तक
योग
ब्रह्म 15:55 तक
इंद्र 12:30, 25 अप्रैल तक
करण
बालव 14:32 तक
कौलव 01:13, 25 अप्रैल तक
तैतिल 11:45, 25 अप्रैल तक
चंद्र राशि
कुंभ 03:25, 25 अप्रैल तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
19:00
चंद्रोदय
03:30
चंद्रास्त
15:21
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
14:07 – 15:45
यमगंड
05:59 – 07:37
गुलिक काल
09:15 – 10:52

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5907:04दिन
मंगल07:0408:09दिन
सूर्य08:0909:15दिन
शुक्र09:1510:20दिन
बुध10:2011:25दिन
चंद्र11:2512:30दिन
शनि12:3013:35दिन
गुरु13:3514:40दिन
मंगल14:4015:45दिन
सूर्य15:4516:50दिन
शुक्र16:5017:55दिन
बुध17:5519:00दिन
चंद्र19:0019:55रात
शनि19:5520:50रात
गुरु20:5021:44रात
मंगल21:4422:39रात
सूर्य22:3923:34रात
शुक्र23:3400:29रात
बुध00:2901:24रात
चंद्र01:2402:19रात
शनि02:1903:14रात
गुरु03:1404:09रात
मंगल04:0905:04रात
सूर्य05:0405:59रात

अयनांश 24.2106° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।