19 नवंबर 2025 को पुष्कर का चौघड़िया

बुधवार, 19 नवंबर 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 नवंबर 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (09:44 तक), नक्षत्र स्वाति (07:59 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:53 पर और सूर्यास्त 17:40 पर है। राहुकाल 12:17 से 13:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:53 – 17:40
रात 06:54 तक
तिथि
अमावस्या
नक्षत्र
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:53 – 08:14शुभ
अमृत08:14 – 09:35शुभ
काल09:35 – 10:56टालें
शुभ10:56 – 12:17शुभ
रोग12:17 – 13:37टालें
उद्वेग13:37 – 14:58टालें
चर14:58 – 16:19सामान्य
लाभ16:19 – 17:40शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:40 – 19:19टालें
शुभ19:19 – 20:58शुभ
अमृत20:58 – 22:38शुभ
चर22:38 – 00:17सामान्य
रोग00:17 – 01:56टालें
काल01:56 – 03:35टालें
लाभ03:35 – 05:15शुभ
उद्वेग05:15 – 06:54टालें

19 नवंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 09:44 तक
अमावस्या 12:17, 20 नव॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 07:59 तक
विशाखा 10:58, 20 नव॰ तक
योग
सौभाग्य 09:00 तक
शोभन 09:52, 20 नव॰ तक
करण
शकुनि 09:44 तक
चतुष्पद 23:00 तक
नाग 12:17, 20 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 04:14, 20 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:53
सूर्यास्त
17:40
चंद्रोदय
05:58
चंद्रास्त
16:49
दिनमान
10h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:38 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:17 – 13:37
यमगंड
08:14 – 09:35
गुलिक काल
10:56 – 12:17

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5307:47दिन
चंद्र07:4708:41दिन
शनि08:4109:35दिन
गुरु09:3510:29दिन
मंगल10:2911:23दिन
सूर्य11:2312:17दिन
शुक्र12:1713:10दिन
बुध13:1014:04दिन
चंद्र14:0414:58दिन
शनि14:5815:52दिन
गुरु15:5216:46दिन
मंगल16:4617:40दिन
सूर्य17:4018:46रात
शुक्र18:4619:52रात
बुध19:5220:58रात
चंद्र20:5822:05रात
शनि22:0523:11रात
गुरु23:1100:17रात
मंगल00:1701:23रात
सूर्य01:2302:29रात
शुक्र02:2903:35रात
बुध03:3504:42रात
चंद्र04:4205:48रात
शनि05:4806:54रात

अयनांश 24.2186° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।