21 नवंबर 2025 को पुष्कर का चौघड़िया

शुक्रवार, 21 नवंबर 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 21 नवंबर 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (14:47 तक), नक्षत्र अनुराधा (13:56 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 17:39 पर है। राहुकाल 10:56 से 12:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 17:39
रात 06:55 तक
तिथि
प्रतिपदा, 14:47 तक
द्वितीया
नक्षत्र
अनुराधा, 13:56 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:55 – 08:15सामान्य
लाभ08:15 – 09:36शुभ
अमृत09:36 – 10:56शुभ
काल10:56 – 12:17टालें
शुभ12:17 – 13:38शुभ
रोग13:38 – 14:58टालें
उद्वेग14:58 – 16:19टालें
चर16:19 – 17:39सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:39 – 19:19टालें
काल19:19 – 20:58टालें
लाभ20:58 – 22:38शुभ
उद्वेग22:38 – 00:17टालें
शुभ00:17 – 01:57शुभ
अमृत01:57 – 03:36शुभ
चर03:36 – 05:16सामान्य
रोग05:16 – 06:55टालें

21 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 14:47 तक
शुक्ल द्वितीया 17:11, 22 नव॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 16:47, 22 नव॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 10:43 तक
सुकर्मा 11:29, 22 नव॰ तक
करण
बव 14:47 तक
बालव 04:00, 22 नव॰ तक
कौलव 17:11, 22 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
17:39
चंद्रोदय
07:49
चंद्रास्त
18:12
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 06:02
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
10:56 – 12:17
यमगंड
14:58 – 16:19
गुलिक काल
08:15 – 09:36

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5507:48दिन
बुध07:4808:42दिन
चंद्र08:4209:36दिन
शनि09:3610:30दिन
गुरु10:3011:23दिन
मंगल11:2312:17दिन
सूर्य12:1713:11दिन
शुक्र13:1114:04दिन
बुध14:0414:58दिन
चंद्र14:5815:52दिन
शनि15:5216:46दिन
गुरु16:4617:39दिन
मंगल17:3918:46रात
सूर्य18:4619:52रात
शुक्र19:5220:58रात
बुध20:5822:05रात
चंद्र22:0523:11रात
शनि23:1100:17रात
गुरु00:1701:24रात
मंगल01:2402:30रात
सूर्य02:3003:36रात
शुक्र03:3604:43रात
बुध04:4305:49रात
चंद्र05:4906:55रात

अयनांश 24.2187° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।