2 सितंबर 2026 को पुष्कर का चौघड़िया

बुधवार, 2 सितंबर 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 2 सितंबर 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (06:13 तक), नक्षत्र भरणी (01:43, 3 सित॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:11 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 12:31 से 14:06 तक है।

दिन और रात
दिन 06:11 – 18:50
रात 06:12 तक
तिथि
षष्ठी, 04:26 तक
सप्तमी
नक्षत्र
भरणी, 01:43 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:11 – 07:46शुभ
अमृत07:46 – 09:21शुभ
काल09:21 – 10:56टालें
शुभ10:56 – 12:31शुभ
रोग12:31 – 14:06टालें
उद्वेग14:06 – 15:41टालें
चर15:41 – 17:15सामान्य
लाभ17:15 – 18:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:50 – 20:16टालें
शुभ20:16 – 21:41शुभ
अमृत21:41 – 23:06शुभ
चर23:06 – 00:31सामान्य
रोग00:31 – 01:56टालें
काल01:56 – 03:21टालें
लाभ03:21 – 04:47शुभ
उद्वेग04:47 – 06:12टालें

2 सितंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 06:13 तक
कृष्ण षष्ठी 04:26, 3 सित॰ तक
कृष्ण सप्तमी 02:25, 4 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 01:43, 3 सित॰ तक
कृत्तिका 00:29, 4 सित॰ तक
योग
ध्रुव 21:12 तक
व्याघातअशुभ 18:33, 3 सित॰ तक
करण
तैतिल 06:13 तक
गर 17:21 तक
वणिज 04:26, 3 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:27, 3 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:11
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
21:56
चंद्रास्त
11:01
दिनमान
12h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:56 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:31 – 14:06
यमगंड
07:46 – 09:21
गुलिक काल
10:56 – 12:31

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1107:15दिन
चंद्र07:1508:18दिन
शनि08:1809:21दिन
गुरु09:2110:24दिन
मंगल10:2411:28दिन
सूर्य11:2812:31दिन
शुक्र12:3113:34दिन
बुध13:3414:37दिन
चंद्र14:3715:41दिन
शनि15:4116:44दिन
गुरु16:4417:47दिन
मंगल17:4718:50दिन
सूर्य18:5019:47रात
शुक्र19:4720:44रात
बुध20:4421:41रात
चंद्र21:4122:37रात
शनि22:3723:34रात
गुरु23:3400:31रात
मंगल00:3101:28रात
सूर्य01:2802:25रात
शुक्र02:2503:21रात
बुध03:2104:18रात
चंद्र04:1805:15रात
शनि05:1506:12रात

अयनांश 24.2296° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।