28 अक्टूबर 2026 को पुष्कर का चौघड़िया

बुधवार, 28 अक्टूबर 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (01:07, 29 अक्टू॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (13:26 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 17:52 पर है। राहुकाल 12:15 से 13:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 17:52
रात 06:38 तक
तिथि
तृतीया, 01:07 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
कृत्तिका, 13:26 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:38 – 08:02शुभ
अमृत08:02 – 09:26शुभ
काल09:26 – 10:51टालें
शुभ10:51 – 12:15शुभ
रोग12:15 – 13:39टालें
उद्वेग13:39 – 15:03टालें
चर15:03 – 16:28सामान्य
लाभ16:28 – 17:52शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:52 – 19:28टालें
शुभ19:28 – 21:04शुभ
अमृत21:04 – 22:39शुभ
चर22:39 – 00:15सामान्य
रोग00:15 – 01:51टालें
काल01:51 – 03:27टालें
लाभ03:27 – 05:03शुभ
उद्वेग05:03 – 06:38टालें

28 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 01:07, 29 अक्टू॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 22:10, 29 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:11, 29 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 07:18 तक
वरीयान 03:40, 29 अक्टू॰ तक
परिघअशुभ 00:06, 30 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 14:37 तक
विष्टि (भद्रा) 01:07, 29 अक्टू॰ तक
बव 11:37, 29 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
17:52
चंद्रोदय
19:28
चंद्रास्त
08:52
दिनमान
11h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:56 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:37 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:15 – 13:39
यमगंड
08:02 – 09:26
गुलिक काल
10:51 – 12:15

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3807:34दिन
चंद्र07:3408:30दिन
शनि08:3009:26दिन
गुरु09:2610:23दिन
मंगल10:2311:19दिन
सूर्य11:1912:15दिन
शुक्र12:1513:11दिन
बुध13:1114:07दिन
चंद्र14:0715:03दिन
शनि15:0316:00दिन
गुरु16:0016:56दिन
मंगल16:5617:52दिन
सूर्य17:5218:56रात
शुक्र18:5620:00रात
बुध20:0021:04रात
चंद्र21:0422:08रात
शनि22:0823:11रात
गुरु23:1100:15रात
मंगल00:1501:19रात
सूर्य01:1902:23रात
शुक्र02:2303:27रात
बुध03:2704:31रात
चंद्र04:3105:35रात
शनि05:3506:38रात

अयनांश 24.2317° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।